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Uttarakhand Elections 2027: हैट्रिक की राह में 3000 बूथों की चुनौती, भाजपा का मास्टर प्लान तैयार

Published: Thu, 05 Nov 2026 10:17 AM (IST)Updated: Thu, 05 Nov 2026 10:33 AM (IST)

उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा ने 3,000 कमजोर बूथों को चिह्नित कर मास्टर प्लान तैयार किया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। फाइल फोटो

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। फाइल फोटो

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संक्षेप में पढ़ें

अश्वनी त्रिपाठी, देहरादून । चुनाव में जीत का रास्ता बूथ से होकर गुजरता है। भाजपा नेतृत्व ने विजयश्री का यही मंत्र कार्यकर्ताओं को दिया है, लेकिन उत्तराखंड में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के नतीजों ने पार्टी को यह भी बताया कि केवल बूथों पर बढ़त बनाना जीत की गारंटी नहीं है।

कई विधानसभा क्षेत्रों में अधिक बूथों पर आगे रहने के बावजूद पार्टी प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा। अब वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में इस कमजोरी को दूर करने के लिए भाजपा ने कुल 12,543 मतदेय स्थलों में से करीब 3,000 कमजोर बूथ चिह्नित किए हैं। इन बूथों पर संगठन की सक्रियता बढ़ाने से लेकर मतदाताओं के बीच पैठ मजबूत करने तक का मास्टर प्लान तैयार है।

मास्टर प्लान तैयार

दरअसल, वर्ष 2022 के चुनाव के बाद भाजपा की बूथवार समीक्षा में सामने आए आंकड़ों ने पार्टी को कई संकेत दिए। हरिद्वार ग्रामीण में भाजपा 87 बूथों पर पहले स्थान पर, जबकि 61 बूथों पर दूसरे स्थान पर रही। अल्मोड़ा में 85 बूथों पर आगे रही, लेकिन महज 127 मतों के अंतर से हार गई।

हल्द्वानी में 105 बूथों पर बढ़त के बावजूद प्रत्याशी 7814 मतों से पराजित हुए। भगवानपुर में पार्टी केवल दस बूथों पर पहले स्थान पर रही, जबकि 130 बूथों पर तीसरे स्थान पर खिसक गई। यमुनोत्री में भी भाजपा महज 12 बूथों पर पहले और 128 बूथों पर तीसरे स्थान पर रही।

बदरीनाथ, पिथौरागढ़, प्रतापनगर और धारचूला में भी दूसरे स्थान पर रहने वाले बूथों की संख्या खासी थी। आंकड़ों से स्पष्ट है कि कई क्षेत्रों में भाजपा के सामने मतदाताओं के बीच स्वीकार्यता और पहुंच बढ़ाने की चुनौती है। वर्ष 2027 के लिए पार्टी की रणनीति इसी चुनौती का समाधान तलाशती दिख रही है।

प्रदेश की सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में विस्तारकों की तैनाती कर दी गई है। इनकी जिम्मेदारी बूथ समितियों की सक्रियता और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों का फीडबैक जुटाकर कमजोर बूथों पर बूथ अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी तय करना है। सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों, युवा और महिला मतदाताओं तक पहुंच बनाने पर भी जोर है। इस बार भाजपा के सामने तीन स्तरों पर काम कर रही है। जिन बूथों पर पार्टी दूसरे स्थान पर रही, वहां पहले स्थान तक पहुंचना और तीसरे स्थान वाले बूथों पर मुकाबले में वापसी करना।

वहीं, पहले स्थान वाले बूथों पर बढ़त को मजबूत करना। इसके लिए ही 3000 कमजोर बूथों को चिह्नित किया गया है। संगठन ने इन सभी बूथों की कमजोरियों को दूर कर चुनाव में विजय हासिल करने का रास्ता तैयार किया है।

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