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उत्तराखंड में भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली का परीक्षण, कुछ स्थानों पर आई तकनीकी दिक्कतें

Published: Fri, 09 Oct 2026 09:59 PM (GMT+05:30)

उत्तराखंड में भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली का परीक्षण किया गया, जिसमें 112 सायरन पर अलर्ट मिला लेकिन देहरादून समेत कुछ स्थानों पर तकनीकी दिक्कतें आईं।

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राज्य ब्यूरो, जागरण देहरादून। भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में शुक्रवार सुबह 11 बजे सायरन बजाकर भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली की कार्यक्षमता परखी गई। इस दौरान देहरादून समेत राज्य के कुछ अन्य स्थानों पर सायरन के संचालन में तकनीकी दिक्कतें भी आईं, जिस कारण लोगों को अलर्ट सुनाई नहीं दिया।

उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) के राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से पूरी प्रक्रिया की निगरानी की गई। यूएसडीएमए के अनुसार राज्य में स्थापित 112 सायरन पर अलर्ट प्राप्त हुआ। भूदेव मोबाइल एप पर भी परीक्षण चेतावनी मिली।

भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के परीक्षण की निगरानी के दृष्टिगत आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में मौजूद रहे, जबकि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) रुड़की के विज्ञानी आनलाइन माध्यम से परीक्षण से जुड़े।

आपदा प्रबंधन सचिव सुमन ने बताया कि परीक्षण काफी हद तक सफल रहा। जिन स्थानों पर सायरन के संचालन में तकनीकी दिक्कतें सामने आईं, उन्हें चिह्नित कर दूर किया जाएगा।

हर माह नौ तारीख को सुबह 11 बजे बजेगा सायरन

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने प्रत्येक माह की नौ तारीख को सुबह 11 बजे सायरन बजाकर इस प्रणाली का नियमित परीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य सेंसर, सायरन और मोबाइल ऐप की कार्यप्रणाली जांचना तथा तकनीकी खामियों को समय रहते दूर करना है। नियमित परीक्षण से वास्तविक आपदा के दौरान चेतावनी प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

169 सेंसर से हो रही निगरानी

राज्य में वर्तमान में भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के तहत 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित किए गए हैंं। यूएसडीएमए और आइआइटी रुड़की के सहयोग से अतिरिक्त सेंसर लगाने की योजना है। इससे भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी और चेतावनी व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा।

आपदा प्रबंधन सचिव ने कहा कि शुक्रवार को बजाए गए सायरन वास्तविक भूकंप की चेतावनी नहीं, बल्कि पूर्व निर्धारित परीक्षण का हिस्सा थे। उन्होंने लोगों से भूदेव ऐप का अपडेट संस्करण अपलोड करने और उसे लोकेशन की अनुमति देने की अपील की, ताकि आपात स्थिति में चेतावनी संदेश प्राप्त हो सकें।

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