उत्तराखंड कांग्रेस में मचे घमासान से भाजपा में बम-बम, हरीश रावत की जनसंवाद यात्रा से छिड़ा विवाद
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की यात्रा ने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को सतह पर ...और पढ़ें
अश्वनी त्रिपाठी, जागरण, देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा ने कांग्रेस में चल रही खींचतान को सतह पर ला दिया है। बड़ा सवाल यह है कि ऐसे मतभेदों के बीच कांग्रेस चुनाव में जीत की राह कैसे बनाएगी, उधर भाजपा पूरे प्रकरण पर नजर बनाए है और कांग्रेस की गुटबाजी में हैटट्रिक की राह आसान करने का रोडमैप तलाश रही है।
पहले ही भाजपा व कांग्रेस की सांगठनिक तैयारियों में बड़ा फासला है। भाजपा में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के दौरों के बाद पार्टी ने बूथ स्तर तक अपनी तैयारियों को पुख्ता किया है। वहीं कांग्रेस में संगठनात्मक स्तर पर खींचतान तो है ही, प्रदेश के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी टकराव के तेवर में आ गए हैं।

उनके कार्यक्रम में प्रीतम सिंह जैसे मजबूत नेता व सात विधायकों की मौजूदगी ने कांग्रेस की खेमेबाजी साफ कर दी है। खासतौर पर प्रीतम सिंह को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वह कांग्रेस की चुनाव अभियान समिति के प्रमुख हैं।
सवाल यह है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की अगुआई में प्रीतम सिंह और हरीश रावत क्या कांग्रेस के चुनाव अभियान को सफलतापूर्वक आगे बढ़ा पाएंगे या चुनाव नजदीक आने के साथ ही पार्टी की अंतर्कलह और तेज होगी।
आसान नहीं गोदियाल की राह
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की राह आसान नहीं दिख रही। उन्हें नई प्रदेश कार्यकारिणी के गठन में ही सात महीने लग गए। इसमें प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत जैसे मजबूत नेताओं को साथ लिया गया, जबकि हरीश रावत को कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली।
हरीश रावत के विरोधी माने जाने वाले हरक सिंह रावत को चुनाव प्रबंधन समिति की कमान मिलने से यह संदेश गया कि केंद्रीय नेतृत्व विधानसभा चुनाव में हरीश रावत को बड़ी भूमिका देने के पक्ष में नहीं है।

इससे नाराज रावत ने धन्यवाद यात्रा निकालकर अपनी सक्रियता दिखाई। यात्रा में जुटी भीड़ और वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान सामने ला दी। इससे भाजपा को भी कांग्रेस पर निशाना साधने का मौका मिला। ऐसे में सवाल है कि बंटा हुआ कांग्रेस नेतृत्व भाजपा के मजबूत संगठनात्मक ढांचे की चुनौती से कैसे निपटेगा?
कांग्रेस झगड़ों में उलझी, अंतिम बूथ तक पहुंची भाजपा
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन उत्तराखंड में दो बार प्रवास कर चुनावी अभियान की समीक्षा कर चुके हैं। भाजपा ने राममाधव जैसे रणनीतिकार को प्रदेश का प्रभारी बनाया।
उनके साथ संगठन के माहिर अरविंद मेनन और युवाओं में लोकप्रिय सांसद बांसुरी स्वराज को सह प्रभारी व फणींद्रनाथ शर्मा को प्रदेश संगठन महामंत्री बनाया। इन सभी ने मिलकर अंतिम मतदाता तक पहुंच की रणनीति बनाई। स्पष्ट है कि चुनावी तैयारियों के लिहाज से भाजपा अभी बढ़त बनाती दिख रही है।
मुख्यमंत्री धामी ने खुद संभाला मोर्चा
खुद मुख्यमंत्री धामी लगातार प्रदेश के दौरे कर रहे चुनावी अभियान को धार देकर जनता का फीडबैक ले रहे हैं। उधर कांग्रेस की सिरफुटव्वल ने भाजपा की तैयारियों को मजबूती देने का काम किया है।
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जाहिर है, जब तक कांग्रेस अंतर्कलह पर विराम लगाएगी, तब तक चुनाव सिर पर आ चुका होगा। ऐसे में भाजपा की मजबूत संगठनात्मक तैयारियों के सामने कांग्रेस को न केवल अपनी संगठनात्मक कमजोरी बल्कि अंदरूनी खींचतान से भी जूझना होगा। यदि कांग्रेस की अंतर्कलह पर समय रहते विराम नहीं लगा तो भाजपा की चुनावी बढ़त को चौंकाने वाला नहीं माना जाएगा।
