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उत्तराखंड में बंजर भूमि पर बांस की खेती से किसानों की बढ़ेगी आय, बांस एवं रेशा विकास परिषद देगी बढ़ावा

Published: Sat, 07 Nov 2026 06:01 PM (GMT+05:30)

उत्तराखंड में 2.15 लाख हेक्टेयर परती और बंजर भूमि पर अब बांस की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। उत्तराखंड बांस ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई से बनाई गई है

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राज्य ब्यूरो, जागरण देहरादून। उत्तराखंड में खेती से दूरी और पलायन के चलते कृषि भूमि के परती होने का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। प्रदेश में ऐसी भूमि का क्षेत्रफल बढ़कर करीब 2.15 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जबकि राज्य गठन के समय एक लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि पहले ही बंजर थी।

अब परती व बंजर भूमि की इस चुनौती को अवसर में बदलने की तैयारी है। उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद ने राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत राज्य में निष्प्रयोज्य पड़ी कृषि योग्य भूमि पर बांस की खेती को प्रोत्साहित करने की योजना बनाई है।

इससे जहां बंजर होते खेतों का उपयोग हो सकेगा, वहीं किसानों के लिए आय का नया जरिया भी तैयार होगा। दरअसल, परती भूमि वह कृषि योग्य जमीन है, जिस पर पहले खेती की जाती थी, लेकिन अब विभिन्न कारणों से उसे छोड़ दिया गया है।

राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम की मार, खेती की बढ़ती लागत, जंगली जानवरों से फसलों को नुकसान और रोजगार के लिए पलायन जैसे कारणों से बड़ी संख्या में खेत खाली पड़े हैं। लंबे समय तक उपयोग नहीं होने से ये जमीनें धीरे-धीरे बंजर होती जा रही हैं।

इस परिदृश्य में बांस की खेती को विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। बांस अपेक्षाकृत कम देखरेख में विकसित होने वाली फसल है और इससे विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। बांस का उपयोग निर्माण कार्यों, फर्नीचर, हस्तशिल्प और घरेलू उपयोग की वस्तुओं में होता है। इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर रोजगार और बाजार से जुड़ने के अवसर मिल सकते हैं।

इस पहल के लिए अनुकूल स्थिति यह भी है कि बांस को छूट प्राप्त वृक्ष प्रजातियों में शामिल किया जा चुका है। ऐसे में इसकी बिक्री और परिवहन में पहले जैसी नियामकीय अड़चनें नहीं आएंगी। इससे किसानों को उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में सुविधा होगी।

उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद की सीईओ मीनाक्षी जोशी के अनुसार राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत राज्य में बांस के कृषिकरण को बढ़ावा देने की योजना पर आगे बढ़ा जा रहा है। इस क्रम में किसानों को प्रशिक्षण देने का क्रम शुरू किया गया है।

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