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    Uttarakhand News : उत्‍तराखंड के सभी भू-संपत्ति मानचित्र अगले दो साल में हो जाएंगे डिजिटाइज

    By Sunil NegiEdited By:
    Updated: Mon, 01 Aug 2022 08:12 PM (IST)

    Uttarakhand News उत्‍तराखंड की सभी भू-संपत्ति मानचित्र अगले दो साल में डिजिटाइज हो जाएंगी। सूबे के दो जिलों पौड़ी और अल्मोड़ा में भू-संपत्ति मानचित्रों का डिजिटाइजेशन हो चुका है। शेष 11 जिलों का कार्य प्रगति पर है।

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    प्रदेश के दो जिलों पौड़ी और अल्मोड़ा में समस्त भू-संपत्ति मानचित्रों को डिजिटाइज किया जा चुका है।

    राज्य ब्यूरो, देहरादून। प्रदेश के दो जिलों पौड़ी और अल्मोड़ा में समस्त भू-संपत्ति मानचित्रों को डिजिटाइज किया जा चुका है। शेष 11 जिलों में यह कार्य आगामी दो वर्षों यानी सितंबर, 2024 तक पूरा किया जाएगा। प्रदेश में भू-अभिलेखों के डिजिटाइज करने की गति को और तेज करने की तैयारी है।

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    उत्तराखंड केंद्रपोषित योजना के अंतर्गत डिजिटल इंडिया लैंड रिकार्ड माडर्नाइजेशन प्रोग्राम के प्रति गंभीर है। भू-अभिलेखों और उनसे संबंधित कार्यालयों के कंप्यूटरीकरण और डिजिटाइजेशन को अभियान का रूप दिया गया है।

    इसके परिणाम सामने आने लगे हैं। अब सभी जिलों में कैडस्ट्रल मैप यानी भू-संपत्ति मानचित्रों का डिजिटाइजेशन किया जा रहा है। दो जिलों में यह कार्य पूरा किया जा चुका है। अब चरणबद्ध तरीके से अन्य जिलों में भू-संपत्ति मानचित्र को डिजिटाइज किया जा रहा है। अगले दो साल के भीतर इस कार्य को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    प्रदेश में सभी 54 सब रजिस्ट्रार कार्यालयों का कंप्यूटरीकरण किया जा चुका है। 96 प्रतिशत खसरों के लिए यूनिक आइडेंटिफिकेशन पार्सल नंबर जारी किए जा चुके हैं। राज्य को एक उपलब्धि स्वामित्व अभिलेखों के रूप में प्राप्त हुई है। अब तक 6591 गांवों में कुल 2,04,212 स्वामित्व अभिलेख तैयार किए जा चुके हैं।

    महत्वपूर्ण यह है कि इनमें से 162945 स्वामित्व अभिलेखों का वितरण भी किया जा चुका है। सभी 13 जिलों में 7576 आबाद गांवों के भीतर आवासीय संपत्तियों के ड्रोन सर्वेक्षण का काम पूरा हो चुका है। उत्तराखंड को 15 अगस्त की प्रतीक्षा है।

    इस दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लाल किले की प्राचीर से उत्तराखंड में केंद्रपोषित स्वामित्व योजना का शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने की घोषणा करेंगे। इसके साथ ही हरियाणा के बाद यह उपलब्धि प्राप्त करने वाला उत्तराखंड दूसरा राज्य बन जाएगा।

    इससे गांवों में भी ग्रामीणों विशेष रूप से महिलाओं को आवासीय परिसंपत्तियों पर ऋण लेने की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। स्वामित्व अभिलेखों के बल पर ग्रामीण अब छोटे और कुटीर उद्योगों के लिए ऋण रूप में धन प्राप्त कर सकेंगे।