उत्तराखंड 108 एंबुलेंस सेवा: हर दिन 379 बार जिंदगी और मौत के बीच दौड़ लगाती 108
उत्तराखंड में 108 एंबुलेंस सेवा प्रतिदिन औसतन 379 आपातकालीन मामलों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाती है, जिसमें सड़क दुर्घटनाओं, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों के मरीज शामिल हैं।


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अश्वनी त्रिपाठी, जागरण, देहरादून। प्रदेश में 108 एंबुलेंस सेवा हर दिन औसतन 379 बार आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए दौड़ती है। यानी हर घंटे करीब 16 बार जिंदगी बचाने की उम्मीद में एंबुलेंस का सायरन गूंजता है।
प्रत्येक वर्ष लगभग 1,38,369 मामलों में एंबुलेंस की सेवा ली जा रही है। इनमें सड़क हादसों के घायलों से लेकर गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों तक को पहुंचाई गई मदद शामिल है।
रिपोर्ट के अनुसार, सालाना 11,512 सड़क दुर्घटना मामलों में 108 की मदद ली गई। यानी हर दिन करीब 32 बार सड़क हादसों के मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए सेवा की जरूरत पड़ी।
प्रसव से लेकर सांस और हृदय की परेशानी में सहारा
108 एंबुलेंस गर्भवती महिलाओं से लेकर गंभीर मरीजों तक के लिए मददगार बनी है। सालाना गर्भावस्था से जुड़े 39,373 मामले दर्ज हो रहे हैं, जबकि करीब 670 प्रसव एंबुलेंस में हो रहे हैं। सांस, पेट, हृदय संबंधी समस्याओं और स्ट्रोक के मरीजों को भी इस सेवा से अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।
सालाना कितनी बार एंबुलेंस की मदद
108 एंबुलेंस सेवा के लिए उत्तराखंड में 272 वाहन हैं। इनमें 218 बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) और 54 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस हैं। एंबुलेंस का बेड़ा बढ़ाने का कार्य चल रहा है। उम्र पूरी कर चुकी एंबुलेंस को हटाकर उनके स्थान पर नई एंबुलेंस लाई जा रही हैं।
विनय शंकर पांडेय, सचिव-स्वास्थ्य
जिलावार एंबुलेंस की स्थिति
