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    देहरादून के दो दोस्तों ने पेश की मिसाल, दोस्ती के 50 साल पूरे होने पर लिया नेत्रदान और देहदान का संकल्प

    Updated: Sun, 13 Jul 2025 02:03 PM (IST)

    देहरादून में दो दोस्तों ने 50 साल की दोस्ती के उपलक्ष्य में नेत्रदान और देहदान का संकल्प लिया। कर्नल राकेश पांडे और दिग्विजय अग्रवाल ने दधीचि देहदान समिति में यह संकल्प लिया। कर्नल पांडे की पत्नी कुसुम ने भी अंगदान का संकल्प लिया। एक अन्य दंपती रवींद्र कुमार और कोमल मोहन ने भी नेत्रदान और देहदान का संकल्प किया ताकि उनकी मित्रता मृत्यु के बाद भी बनी रहे।

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    किसी की आंखों में, तो किसी के दिल में जिंदा रहेगा दोस्ती का ये फसाना. Concept Photo

    जागरण संवाददाता, देहरादून। सलामत रहे ये दोस्ताना। जीते जी एक दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले दो दोस्त जब इस लोक से विदा होंगे तब भी उनकी दोस्ती की मिसाल कायम रहेगी। वह किसी की आंखों में जिंदा रहेंगे, तो उनकी दोस्ती किसी के दिल में धड़कती रहेगी। देहरादून के इन दोस्तों ने अपनी दोस्ती के 50 साल पूरे होने पर नेत्रदान और देहदान का संकल्प लिया है।

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    देहरादून के रेसकोर्स निवासी रिटायर्ड कर्नल राकेश पांडे (66 वर्ष) और कौलागढ़ निवासी दिग्विजय अग्रवाल (67 वर्ष) की मित्रता आजकल की नहीं, बल्कि उसे पूरे 50 वर्ष हो चुके हैं। आज के भौतिकवादी युग में भी मित्रता के इस मील के पत्थर को छूने को कर्नल राकेश और दिग्विजय ने अपने लिए ही नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी खास बना लिया। अ

    टूट दोस्ती की कसम खाते हुए दधीचि देहदान समिति का दोनों ने नेत्रदान एवं देहदान का संकल्प पत्र भरा। ताकि उनकी मित्रता दूसरों की निगाह और शरीर में भी जिंदा रहकर फूलती-फलती रहे। कर्नल पांडे की पत्नी कुसुम पांडे (60 वर्ष) ने भी इस दोस्ती की मिसाल से प्रेरणा ली और उन्होंने भी पति के साथ अंगदान का संकल्प पत्र भर दिया।

    दूसरी तरफ, देहरादून के भगवंतपुर निवासी ले. कर्नल (रिटा.) रवींद्र कुमार ने पत्नी कोमल मोहन ने भी नेत्रदान और देहदान का संकल्प लिया है। मोहन दंपती का कहना है कि उनका यह बंधन उनके मरने पर भी समाप्त नहीं होना चाहिए। इससे अधिक खुशी की बात और क्या होगी कि उनका अंगदान किसी को नया जीवन देगा और वह भी इस खूबसूरत संसार को उनकी आंखों से देखकर प्रेम की अनुभूति कर सकेंगे।