देहरादून, राज्य ब्यूरो। प्रदेश में दुर्घटनाओं का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। बावजूद इसके हालात यह हैं कि प्रदेश में 27 लाख वाहनों के सापेक्ष केवल 674 कार्मिक ही तैनात हैं, जबकि ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआर एंड डी) के मानकों के अनुसार प्रदेश में 1759 पुलिस कर्मी होने चाहिए। पुलिस द्वारा इन्हीं मानकों को आधार बनाते हुए नए पदों की भर्ती का प्रस्ताव तकरीबन तीन वर्ष पूर्व शासन को भेजा गया था, लेकिन इस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। 

उत्तराखंड के पर्वतीय प्रदेश होने के कारण यहां सड़क दुर्घटनाएं बेहद गंभीर होती हैं। यहां दुर्घटनाओं में जानमाल की हानि ज्यादा होती है। कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए सड़क सुरक्षा समिति का गठन किया था। इस समिति ने सभी प्रदेशों में सड़क सुरक्षा परिषद का गठन करने के निर्देश देने के साथ ही दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए उचित कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इस कड़ी में सड़क सुरक्षा परिषद की एक अहम बैठक कुछ दिनों पूर्व परिवहन मंत्री यशपाल आर्य की अध्यक्षता में हुई। 
बैठक में यह बात सामने आई कि प्रदेश में यातायात पुलिस कर्मियों की संख्या बेहद कम है। स्थिति यह है कि 13 जिलों में कुल सात उप निरीक्षक, 18 उप निरीक्षक, 75 हेड कांस्टेबल और 574 कांस्टेबल मिलाकर, कुल 674 यातायात कर्मी ही यातायात व्यवस्था को संभाले हुए हैं। वहीं बीपीआर एंड डी के मानकों के अनुसार 20 निरीक्षक, 212 उप निरीक्षक, 394 हेड कांस्टेबल और 1133 कांस्टेबलों को यातायात दुरुस्त करने के कार्य में होना चाहिए।
बीपीआर एंड डी के इन्हीं मानकों के अनुसार 2016 में पुलिस मुख्यालय द्वारा यातायात पुलिस में पूर्व में स्वीकृत 573 पदों के सापेक्ष 1759 पदों को स्वीकृत करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। बावजूद इसके स्थिति यह है कि न तो यह प्रस्ताव स्वीकृत हुआ और न ही पुलिस कर्मियों की संख्या बढ़ी। इसके चलते यातायात व्यवस्था संभालने के लिए यातायात के साथ ही सिविल पुलिस का भी सहयोग लेना पड़ रहा है। परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने इस मामले में जल्द ही उचित कदम उठाने की बात कही है।

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