जागरण संवाददाता, देहरादून। Tokyo Olympics 2020 अगर आप लीक से हटकर कुछ करना चाहते हैं तो जाहिर सी बात हैं कि आपके खिलाफ आवाजें भी बुलंद होती हैं। लोग ताने मारते हैं। हर कोई आपका साथ देने के लिए आगे नहीं आता। ऐसा ही कुछ छोटी उम्र में हुआ था हमारी हैट्रिक गर्ल वंदना कटारिया के साथ, लेकिन फिर भी उनकी हिम्मत को डिगा नहीं पाया। इस वक्त में उनका गुरु बनकर खड़े हुए उनके पिता और फिर वंदना दौड़ पड़ी लक्ष्य को साधने को।

वंदना कटारिया उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में स्थित छोटे से क्षेत्र रोशनाबाद से आती हैं। उनका पूरा परिवार यहीं रहता है। हरिद्वार भेल से सेवानिवृत्त होने के बाद वंदना के पिता नाहर सिंह ने रोशनाबाद में दूध का व्यवसाय शुरू किया था। उनकी सरपरस्ती में ही वंदना कटारिया ने रोशनाबाद से अपनी हाकी की यात्रा शुरू की।

उस वक्त गांव में वंदना के इस कदम को लेकर स्थानीय लोगों ने परिवार के साथ उनका भी मजाक उड़ाया था। वंदना को ताने सुनने पड़े, लेकिन पिता का मजबूत हाथ उनके सिर पर हमेशा रहा। इसने वंदना को आगे बढ़ने की हिम्मत दी और वो अपने सपने को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाती गई। फिर मां सोरण देवी ने भी लोगों की बातों की परवाह नहीं की और वंदना के सपने को साकार करने के लिए उसके हर कदम में उसका साथ देने लगीं।

लड़कों के साथ प्रैक्टिस करती थीं वंदना

वंदना ने हाकी की शुरुआत रोशनाबाद से ही की। क्षेत्र में खेलों को लेकर मजबूत सुविधाएं नहीं थी, जिसकी वजह से वंदना को अपने सपने को साकार करने के लिए कई तरह की दिक्कतों से जूझना पड़ा। खेल का मैदान नहीं मिला न खेलने को साथी तो वंदना ने शुरुआती दौर में लड़कों के साथ ही प्रैक्टिस करनी शुरू कर दी। हालांकि, इसके लिए उन्हें और परिवार को कई बातें भी सुननी पड़ी। पर, उन्होंने इसकी परवाह नहीं की और वो धीरे-धीरे वो अपने खेल को निखारती गईं। फिर उन्होंने अपने खेल को मजबूती देने के लिए प्रोफेशनल तौर पर मेरठ से शुरुआत की।

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पिता का कुछ ही महीनों पहले हुआ निधन

मई में वंदना ने अपने पिता को खो दिया, जब उनके पिता का निधन हुआ, उस वक्त वो टोक्यो ओलिंपिक की तैयारियों में जुटी हुई थी। वंदना कटारिया ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हुए मैच में शानदार प्रदर्शन कर पिता को श्रद्धांजलि दी है।

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Edited By: Raksha Panthri