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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 07, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

यहां हर 15 दिन में रंग बदलती है घाटी, ये खूबसूरत नजारा नहीं मिलेगा कहीं और

By Raksha PanthariEdited By:
Published: Fri, 07 Jun 2019 05:59 PM (IST)Updated: Fri, 07 Jun 2019 08:55 PM (IST)

अगर आप अभी तक फूलों की घाटी का दीदार नहीं कर पाए हैं तो देर मत कीजिए और चले आइये ...और पढ़ें

यहां हर 15 दिन में रंग बदलती है घाटी, ये खूबसूरत नजारा नहीं मिलेगा कहीं और
यहां हर 15 दिन में रंग बदलती है घाटी, ये खूबसूरत नजारा नहीं मिलेगा कहीं और

देहरादून, जेएनएन। उत्तराखंड, एक ऐसा राज्य जहां कदम-कदम पर प्रकृति ने अपनी नेमतें बिखेरी हैं। सुंदर वादियों से घिरे इस राज्य में घूमने के लिए कई स्थल हैं, जिनमें से एक है विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी। वैसे तो आप सभी फूलों की घाटी के सौंदर्य से भलीभांति परिचित होंगे, लेकिन इस घाटी को लेकर एक और भी रोचक बात है। कहा जाता है कि ये घाटी हर पंद्रह दिन में अपना रंग बदलती है। इसके पीछे कोई चमत्कार नहीं, बल्कि यहां फूलों की सैकड़ों प्रजातियां मौजूद हैं और हर प्रजाति दस-पंद्रह दिन के अंतराल में खिलती है। इससे ऐसा लगता है मानो घाटी रंग बदल रही है। 

उत्तराखंड देश-विदेश में अपनी एक अलग पहचान रखने वाला प्रदेश है। हर साल यहां भारी तादाद में देशी-विदेशी पर्यटक सुकून की तलाश में पहुंचते हैं। यहां की शुद्ध आबोहवा बरबस ही उन्हें बार-बार यहां खींच लाती है। इसलिए कहा जाता है कि जो एक बार उत्तराखंड आकर यहां के पर्यटक स्थलों में घूमने के लिए जाता है, वो यहां का मुरीद बनकर रह जाता है। वैसे तो उत्तराखंड में कई पर्यटक स्थल हैं, लेकिन इनमें से एक बेहद ही खास टूरिस्ट डेस्टिनेशन है फूलों की घाटी यानी वैली ऑफ फ्लावर्स। 

चमोली जिले में स्थित फूलों की घाटी समुद्र तल से 3962 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। ये घाटी 87.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैली हुई है। इस घाटी का जिक्र रामायण में भी हुआ है। माना जाता है कि रामायण काल में हनुमान संजीवनी बूटी की खोज में इसी घाटी में पहुंचे थे। इस घाटी को लेकर एक और खास बात भी है कि यहां आप सिर्फ दिन का ही सफर कर सकते हैं। यहां रात को रुकने की अनुमति नहीं है। दरअसल, इस घाटी में फूलों की ऐसी कई प्रजातियां हैं, जिनकी महक आपको बेहोश कर सकती है। यही वजह है कि आप यहां रात तक नहीं रुक सकते हैं। 

फूलों के साथ ही इन वन्यजीवों का भी कर सकते हैं दीदार 

फूलों की घाटी में आप न सिर्फ फूलों के मनमोहक संसार का दीदार कर सकते हैं, बल्कि यहां लुप्तप्राय जानवर काला भालू, हिम तेंदुआ, भूरा भालू, कस्तूरी मृग, मोनाल, हिरण, रंग-बिरंगी तितलियां, मोनाल और पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों से भी रूबरू हो सकते हैं। अगस्त और सितंबर के बीच घाटी की आभा देखते ही बनती है, क्‍योंकि इसी दौरान घाटी में सर्वाधिक फूल खिलते हैं। 

यहां पाई जाती हैं फूलों की इतनी प्रजातियां 

इस घाटी में फूलों की करीब पांच सौ प्रजातियां पाई जाती हैं। यहां ब्रह्मकमल, जर्मेनियम, कस्तूरा कमल, हिमालयी नीला पोस्त, लिलियम, बछनाग, डेलफिनियम, रोडोडियाड्रोन, अर्बेनियम बेथमानी, मार्श समेत कई प्रजातियां शामिल हैं। जिनकी खूबसूरती घाटी के सौंदर्य के सौंदर्य में चार चांद लगाती हैं।   

विश्व धरोहर है फूलों की घाटी 

उत्तराखंड हिमालय में स्थित नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान और फूलों की घाटी सम्मिलित रूप से विश्व धरोहर स्थल घोषित हैं। फूलों की घाटी को वर्ष 2005 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया। 

फूलों की घाटी तक पहुंचने से पहले भी पड़ते हैं कई खूबसूरत पड़ाव 

जोशीमठ 

फूलों की घाटी के लिए आपको सबसे पहले जोशीमठ आना होगा। ये अलकनंदा के बायें किनारे पर स्थित एक बेहद ही खूबसूरत जगह है। यहां प्रवेश करते ही आपके सामने सड़क के किनारे एक छोटा झरना जोगीधारा पड़ेगा। इसे जोगीधारा इसलिए कहा जाता है, क्योंकि कई साधु-संत झील के ठंडे जल में यहां स्नान करने के लिए रुकते हैं। यहां की खूबसूरती के भी आप कायल हो जाएंगे। 

गोविंदघाट 

गोविंदघाट अलकनंदा और लक्ष्मण गंगा के संगम पर स्थित है, जो फूलों की घाटी के साथ ही हेमकुंड साहिब की यात्रा का भी मुख्य पड़ाव है। 

घांघरिया 

घांघरियां एक छोटा सा और बेहद खूबसूरत गांव है, जो 3049 मीटर की ऊंचाई पर उत्तरी हिमालय पर्वतमाला में स्थित है। घांघरिया भ्‍यूंडार और पुष्पावती नदी के संगम पर स्थित है। यहां से फूलों की घाटी की दूरी करीब तीन किलोमीटर है। 

प्रवेश शुल्क 

भारतीय 

प्रति व्यक्ति-150 रुपये 

प्रति बच्चा -75 रुपये 

विदेशी 

प्रति व्यक्ति-600 रुपये 

प्रति बच्चा-300 रुपये 

बीते पांच वर्ष में फूलों की घाटी पहुंचे पर्यटक 

वर्ष,       पर्यटक     

2018    14000     

2017    13752     

2016     6503     

2015     181     

2014     484 

ऐसे पहुंचे फूलों की घाटी 

अगर आप भी अभी तक फूलों की घाटी का दीदार नहीं कर पाए हैं। तो तैयार हो जाइए। ये आपके लिए बेहद ही मुफीद मौका है। दरअसल, फूलों की घाटी एक जून को सैलानियों के लिए खुल चुकी है। फूलों की घाटी पहुंचने के लिए चमोली जिले का अंतिम बस अड्डा गोविंदघाट तीर्थनगरी ऋषिकेश से 275 किलोमीटर की दूरी पर है, जो कि जोशीमठ-बदरीनाथ के बीच पड़ता है। ऋषिकेश तक रेल से भी पहुंचा जा सकता है, जबकि निकटतम हवाई अड्डा देहरादून के पास जॉलीग्रांट हवाई अड्डा है। गोविंदघाट से फूलों की घाटी के प्रवेश स्थल घांघरिया की दूरी 13 किलोमीटर है। जहां से पर्यटक तीन किलोमीटर लंबी और आधा किलोमीटर चौड़ी फूलों की घाटी का दीदार कर सकते हैं। जोशीमठ से गोविंदघाट की दूरी 19 किलोमीटर है। 

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