राज्य ब्यूरो, देहरादून: सड़कें दुरुस्त होंगी तो विकास कार्यों को गति मिलेगी, साथ ही सैलानियों की आमद से आर्थिकी भी संवरेगी। आवागमन की बेहतर सुविधा से रोजगार के अवसर सृजित होंगे। सड़कों का जाल फैलाने के लिए पीछे मकसद भी यही है। इस लिहाज से उत्तराखंड में भी सरकार ने सड़कों के विस्तार और सुदृढ़ीकरण पर फोकस किया है, फिर चाहे राष्ट्रीय राजमार्ग हों अथवा राज्य, जिला व ग्रामीण क्षेत्र की सड़कें। तस्वीर का दूसरा पहलू भी है, सिस्टम की बेपरवाही। सड़क निर्माण में मानकों की अनदेखी हो रही है तो रखरखाव के नाम महज लीपापोती।

उत्तराखंड के विकास में सड़कों का अहम योगदान है। जहां तक प्रदेश में सड़कें पहुंची हैं, अपने साथ विकास लाई हैं। यही कारण है कि उत्तराखंड में सड़कों का दायरा लगातार बढ़ रहा है, मगर अब सिस्टम की लापरवाही विकास की राह में रोड़े अटका रही है। सड़कों के निर्माण से लेकर इनके रखरखाव तक में लचर रवैया अपनाया जा रहा है। सड़क निर्माण में जहां मानकों का पूरा अनुपालन नहीं हो रहा है, तो रखरखाव के नाम पर केवल लीपापोती की जा रही है। इसका उदाहरण इसी वर्ष पौड़ी गढ़वाल जिले में दुगड्डा-रथुवाढाब मार्ग पर देखने को मिला, जहां नई सड़क हाथों से उखड़ रही थी।

इसी तरह देहरादून के आरकेडिया में भी नई सड़क वाहन चलते ही दो दिन में उखड़ गई। ये तो चुनिंदा उदाहरण हैं। सड़क के घटिया निर्माण के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इन सड़कों का थर्ड पार्टी आडिट करने की बात भी कही गई है लेकिन इस पर विभाग गंभीरता से काम नहीं कर रहा है। ऐसी सड़कें दुर्घटना का कारण भी बन रही हैं। इन सड़कों का सड़क सुरक्षा आडिट करने को कहा गया है। लोक निर्माण विभाग की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राज्य में 12299.34 किमी सड़कें ऐसी हैं, जो दुर्घटना का कारण बन सकती हैं। इन सड़कों में से 11436 किमी सड़क लोक निर्माण विभाग के अधीन हैं। इनमें से भी अब तक केवल 3130 किमी सड़क का ही आडिट हो पाया है। शेष का आडिट होना बाकी है।

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लोक निर्माण विभाग मंत्री सतपाल महाराज का कहना है क  विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सड़कों का निर्माण मानकों के अनुसार किया जाए। विशेष तौर पर पर्वतीय क्षेत्रों में निर्माण ऐसा हो कि सड़कों पर पानी न टिके। जो भी काम हो, उसका थर्ड पार्टी आडिट किया जाए। गुणवत्ता व मानकों से समझौता करेगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

ये हैं सड़क निर्माण के मानक

  • सड़क बनाते समय पहले पहले पुरानी सड़क को पूरा उखाड़ा जाता है। इसके बाद इसमें नए सिरे से रोड़ी डाली जाती है। फिर तारकोल डाला जाता है और तब इसका डामरीकरण किया जाता है।
  • सड़कों के दोनों ओर नालियां बननी चाहिए। सड़क का निर्माण इस प्रकार से होना चाहिए कि पानी बीच सड़क से दोनों ओर बहते हुए नालियों में जाए।
  • सड़कों में क्रास लाइन व सफेद लाइन बनाई जाएं व सावधानी के चिह्न लगाए जाएं।

  सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता देवेंद्र शाह का कहना है कि प्रदेश में हर सड़क के अलग मानक होते हैं। इसमें चौड़ाई, मोटाई और सामग्री के मिश्रण का अनुपात शामिल है। इनमें किसी भी मानक से समझौता होता है तो नतीजा सड़कों के टूटने के रूप में सामने आता है।

प्रदेश में सड़कों की लंबाई (किमी में)

लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत

  • राष्ट्रीय राजमार्ग - 2091.34
  • प्रादेशिक राजमार्ग - 4511.13
  • मुख्य जिला सड़कें - 2113.18
  • अन्य जिला सड़कें - 2697.32
  • ग्रामीण सड़कें - 25388.72
  • हल्का वाहन मार्ग - 517.31
  • स्थानीय निकायों के अंतर्गत - 3638.46
  • सिंचाई विभाग के अंतर्गत - 741
  • गन्ना विभाग के अंतर्गत- 908.48
  • वन विभाग के अंतर्गत- 3769.76
  • बीआरटीएफ - 885.35
  • कृषि विपणन बोर्ड - 1209.51
  • कुल योग - 48471.56 किमी

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Edited By: Sumit Kumar