जागरण संवाददाता, देहरादून। Swachh Survekshan 2021  स्वच्छ शहर की उम्मीद का जो सपना दूनवासियों ने देखा था, वह काफी हद तक अब सच होता नजर आ रहा है। इसकी वजह जनता का स्वच्छता के प्रति जागरूक होना असल वजह है। साथ ही देहरादून नगर निगम की कार्यशैली में लगातार हो रहा सुधार भी दून शहर की स्वच्छता का एक कारक बना है। अपना दून अब स्वच्छता के पैमाने पर आगे बढ़ने लगा है। केंद्र सरकार की ओर से देश के स्वच्छ शहरों के जो आंकड़े शनिवार को जारी किए, उससे तो यही साबित होता है। स्वच्छता सर्वेक्षण-2021 में दून नगर निगम ने 42 अंकों की उछाल संग 82वां पायदान हासिल किया। गुजरे साल दून 124वें नंबर पर था। राज्य में समस्त नगर निगमों में भी दून अव्वल रहा। महापौर सुनील उनियाल गामा ने दार्जिलिंग में मौजूद होते हुए निगम कर्मियों को वीडियो काल पर बधाई दी एवं इसका श्रेय कर्मचारियों व शहरवासियों को दिया। महापौर ने कहा कि 'दून ने पिछले तीन साल में स्वच्छता के लिहाज से बेहद सुधार किया है। यह सुधार जारी रखते हुए हमारा लक्ष्य अगली बार पहले 50 शहर में शामिल होना  हेगा।'

स्वच्छता सर्वेक्षण के परिणाम जारी होने के उपरांत 'दैनिक जागरण' से फोन पर हुई बातचीत में महापौर गामा ने कहा कि प्रदेश के समस्त नगर निगमों में देहरादून ने पहला स्थान पाया है और इसका प्रदर्शन राष्ट्रीय व प्रदेश के औसत से बेहतर रहा। महापौर के अनुसार दून शहर ने वर्ष 2017 में 316वां, वर्ष 2018 में 257वां जबकि वर्ष 2019 में 384वां स्थान हासिल किया था। बीते वर्ष केंद्र सरकार ने कुल शहरों की संख्या समेत कईं अन्य बदलाव सर्वेक्षण में किए। इसके बावजूद वर्ष 2020 में दून ने 124वां स्थान देश में हासिल किया था।

इस परिणाम को निगम ने चुनौती के रूप में लिया और लक्ष्य निर्धारित किया कि वर्ष 2021 में दून किसी भी सूरत में अंतिम 100 शहरों की सूची में शामिल हो। निगम ने शहर की सड़कों और नाली-नालों की स्वच्छता समेत डोर-टू-डोर कूड़ा उठान में बेहद सुधार किया। सभी सौ वार्डों में कूड़ा उठान शुरू कराया और तमाम संसाधन इसमें लगा दिए। यही वजह है कि दून ने अंतिम 100 शहरों में स्थान प्राप्त कर लिया। यह उपलब्धि सरकार, नगर निगम व आमजन के संयुक्त प्रयास का नतीजा है।

पहले नंबर का कब्जा बरकरार

महापौर गामा ने बताया कि दून ने राज्य में पहले नंबर के नगर निगम का अपना कब्जा बरकरार रखा है। वर्ष 2019 में दून प्रदेश में छह नगर निगमों में पांचवें नंबर पर था मगर 2020 में सुधार करते हुए दून शहर प्रदेश में पहले नंबर पर आया था। इस बार भी बढ़त कायम रही।

पूर्व आयुक्त पांडेय की अहम भूमिका

स्वच्छ शहरों में दून को बढ़त दिलाने में दून नगर निगम के पूर्व आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अहम भूमिका रही। महापौर खुद यह बताते हैं कि जब आइएएस पांडेय वर्ष 2019 जनवरी में दून नगर निगम में नियुक्त हुए थे, तब स्वच्छ सर्वेक्षण अंतिम चरण में था। इसके बाद उन्होंने अथक प्रयास किया और 2020 में दून को पिछली रैंक में 260 अंक की उछाल दिलाई। इस साल भी देश के अंतिम 100 शहरों में स्थान दिलाने का प्रमुख श्रेय पांडेय को जाता है। बता दें कि पांडेय का तीन माह पूर्व हरिद्वार डीएम पद पर तबादला हुआ था। वर्तमान में आइएएस अभिषेक रूहेला दून नगर आयुक्त हैं।

दून की रैंक में सुधार की वजह

-शहर में कूड़ेदानों का कूड़ा नियमित व समय से उठ रहा। डोर-टू-डोर कूड़ा उठान भी पूरे शहर में हो रहा। नगर निगम क्षेत्र से रोजाना 350 मीट्रिक टन से अधिक कूड़ा उठान हो रहा।

- सड़कों के किनारे कूड़ेदान की पर्याप्त संख्या भी एक वजह रही। ताकि आमजन इधर-उधर कूड़ा डालने के बजाए कूड़ेदान में डालें। दुकानों व रेस्तरां में कूड़ेदान रखने की अनिवार्यता भी वजह बनी।

-निगम ने स्वच्छता, संसाधन व सुविधा पर फोकस किया। समाजसेवी संगठनों की मदद से निगम कर्मचारियों ने शहरभर में जागरुकता अभियान चलाए।

-सर्वेक्षण में एक लाख से अधिक जन ने स्वच्छ सर्वेक्षण में एप के जरिए फीडबैक दिया। अंकों में इसका भी काफी योगदान रहा है।

महापौर सुनील उनियाल गामा ने कहा, दूनवासियों के सहयोग बिना यह स्थान पाना संभव नहीं था। जागरूक दूनवासियों ने अपने घरों और दुकान से निकलने वाले कूड़े को बाहर सड़क पर डालने या फैलाने के बजाए नगर निगम के कूड़ा उठान वाहनों में देना शुरू कर दिया है। यही वजह है कि अब सड़क किनारे रखे कूड़ेदान कूड़े से भरे नहीं दिखते हैं। सड़कों पर बिखरा कूड़ा भी उठने से शहर साफ रहता है। अब दूनवासी न तो गंदगी पसंद करते हैं और न करने देते हैं। इस मुकाम के लिए सभी का आभार।

Edited By: Raksha Panthri