विधानसभा चुनाव से पहले इंडिया गठबंधन के जरिए उत्तराखंड में अपनी पैठ बढ़ाएगी सपा, काश्तकार-शिल्पकार आरक्षण पर भी फोकस
समाजवादी पार्टी उत्तराखंड में इंडिया गठबंधन के सहारे अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की तैयारी में है, जिसके तहत कुछ सीटों पर दावेदारी की जा रही है।


समय कम है?
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विकास गुसाईं, देहरादून। उत्तराखंड में लगातार सिकुड़ते राजनीतिक आधार के बीच समाजवादी पार्टी अब इंडिया गठबंधन के सहारे प्रदेश में अपनी मौजूदगी दर्ज करने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी की नजर गठबंधन के तहत कुछ सीटें हासिल कर चुनाव मैदान में उतरने पर है।
हालांकि, उत्तराखंड में कांग्रेस और सपा के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर अभी कोई स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में सपा के सामने गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने, केवल समर्थन देने या फिर स्वतंत्र रूप से प्रत्याशी उतारने के सभी विकल्प खुले हैं।
राज्य गठन के बाद उत्तराखंड में सपा अपनी राजनीतिक पहचान के लिए संघर्ष करती रही है। पार्टी का सबसे उल्लेखनीय प्रदर्शन 2004 के लोकसभा चुनाव में रहा। पार्टी के राजेंद्र कुमार बाड़ी ने हरिद्वार सीट पर जीत दर्ज की थी।
उस चुनाव में सपा को राज्य की पांच लोकसभा सीटों पर कुल 7.93 प्रतिशत मत मिले थे। इसके बाद पार्टी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में इस प्रदर्शन को दोहरा नहीं सकी। विधानसभा चुनाव के आंकड़े भी सपा के घटते जनाधार को दर्शाते हैं।
2002 के पहले विधानसभा चुनाव में पार्टी को 6.30 प्रतिशत मत मिले थे, लेकिन एक भी सीट नहीं मिली। इसके बाद 2007 में मत प्रतिशत करीब पांच प्रतिशत, 2012 में 1.4 प्रतिशत और 2017 में 0.4 प्रतिशत रह गया।
2022 में भी पार्टी का मत प्रतिशत 0.3 प्रतिशत के आसपास रहा। सपा इस समय इंडिया गठबंधन का हिस्सा है। उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की संभावनाओं के बीच उत्तराखंड में सपा कांग्रेस के साथ तालमेल के जरिये चुनावी मैदान में उतरने की संभावना तलाश रही है।
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पार्टी के सामने चुनौती यह है कि प्रदेश में उसका स्वतंत्र चुनावी आधार सीमित है, जबकि कांग्रेस के पास अपेक्षाकृत व्यापक संगठनात्मक आधार है। ऐसे में सपा की रणनीति गठबंधन के माध्यम से अपनी राजनीतिक गतिविधियों को विस्तार देने की है।
पार्टी सामाजिक मुद्दों के जरिये भी अपनी जमीन तैयार करने की कोशिश कर रही है। इसी क्रम में मंडल आयोग की संस्तुतियों के तहत शिल्पकार और काश्तकार को आरक्षण के दायरे में लाने का मुद्दा उठाने की तैयारी है।
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सपा का तर्क है कि प्रदेश में विभिन्न सामाजिक समूहों के लोग काश्तकारी से जुड़े हैं और प्रस्तावित मांग का लाभ ऐसे लोगों तक भी पहुंच सकता है।
सपा के राष्ट्रीय सचिव व पूर्व प्रदेश अध्ययक्ष डॉ सत्यनारायण सचान का कहना है कि सपा इंडिया गठबंधन का हिस्सा है। उत्तरप्रदेश में तो पार्टी का कांग्रेस का गठबंधन है और यहां भी यही प्रयास करेगा।
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