देहरादून, जेएनएन। अग्रिम मेडिकल बिलों के सेटलमेंट के नाम पर साइबर ठग ने कंपनी के नाम से फर्जी मेल भेजकर दून के एक व्यक्ति को एक लाख 90 हजार रुपये की चपत लगा दी। नेहरू कॉलोनी थाना पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

एसओ दिलबर सिंह नेगी के मुताबिक, रेसकोर्स निवासी रविंदरपाल सिंह ने बताया कि उन्होंने वोसला जीएमवीएच कंपनी की डीलरशिप ले रखी है। 22 फरवरी को रविंदरपाल को कंपनी की तरफ से एक मेल आई। जिसमें अग्रिम मेडिकल बिलों के सेटलमेंट के लिए एक लाख 90 हजार रुपये की मांग की गई। 

पैसे भेजने के लिए जाहिर हुसैन नाम के व्यक्ति का खाता नंबर भेजा गया। 26 फरवरी को रविंदरपाल ने मेल का जवाब दिया कि वह निजी खाते में नहीं, बल्कि कंपनी के रजिस्टर्ड खाते में ही पैसे भेज पाएंगे। 27 फरवरी को कंपनी की मेल आइडी से मेल आई कि यदि पैसे नहीं भेजे गए तो डीलरशिप खत्म कर दी जाएगी। 

जिस पर रविंदरपाल ने कंपनी के सीईओ को मेल कर पैसे ट्रांसफर करने के बारे पूछा तो सीईओ ने मेल के माध्यम से ही पैसे ट्रांसफर करने को हामी भर दी। जिस पर रविंदरपाल ने एक लाख 90 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसी दिन रविंदरपाल को कंपनी की मेल आइडी से मेल मिली कि पैसे मिल गए हैं, अब दो लाख रुपये और भेज दो। 

रविंदरपाल ने और पैसे भेजने में असमर्थता जाहिर की। रविंदरपाल ने इस संबंध में जब कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधियों से फोन पर वार्ता की तो पता चला कि कंपनी ने 21 फरवरी के बाद उन्हें कोई मेल नहीं की है और न ही उनसे पैसे मांगे हैं। इस पर उन्हें ठगी का अंदेशा हुआ और पुलिस से शिकायत की। एसओ दिलबर सिंह नेगी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।

रिटायर्ड कर्मचारी के खाते से निकाले 64 हजार रुपये

कृषि विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी के खाते से जालसाज ने साढ़े 64 हजार रुपये निकाल लिए। बताया जा रहा है कि रुपये एटीएम के माध्यम से निकाले गए, जबकि एटीएम कार्ड पीड़ित के पास ही है। ऐसे में एटीएम कार्ड की क्लोनिंग की आशंका जताई जा रही है। इस मामले में पटेलनगर कोतवाली पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

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इंस्पेक्टर सूर्यभूषण नेगी के अनुसार, ब्राह्मणवाला में रहने वाले प्रताप सिंह राणा कृषि विभाग से सेवानिवृत्त हैं। एसबीआइ की राजपुर रोड शाखा में उनका खाता है। बीते अप्रैल के पहले सप्ताह में उनका मोबाइल खो गया। इसके बाद नौ अप्रैल को उनके खाते से रुपये निकाले गए। मोबाइल न होने के कारण तब उन्हें इसकी जानकारी नहीं हो पाई। उन्हें धोखाधड़ी के बारे में 11 मई को तब पता चला, जब एटीएम से मिनी स्टेटमेंट निकाला। 12 मई को प्रताप सिंह ने बैंक शाखा और साइबर सेल को इसकी जानकारी दी। इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया।

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Posted By: Bhanu Prakash Sharma

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