जागरण संवाददाता, ऋषिकेश:

संस्कृत भारती के जनपद संस्कृत सम्मेलन में मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि संस्कृत भाषा भारतीय सभ्यता और संस्कृति की भाषा है। इसकी रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है। कहा कि उत्तराखंड में संस्कृत भाषा को सम्मान दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध होकर काम कर रही है।

गुरुवार को नेपाली क्षेत्र संस्कृत महाविद्यालय में संस्कृत भारती का एक दिवसीय जनपद सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने किया। बताया कि संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड विधानसभा में संस्कृत में सभी नाम पट्टिकाएं लिखवाई गयी हैं। साथ ही विधानसभा में संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया गया है। उन्होंने कार्यक्रम में संस्कृत पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुति देने वाले 70 छात्र-छात्राओं को एक-एक हजार रुपये पुरस्कार देने की घोषणा की। इस अवसर पर संस्कृत भारती के क्षेत्र संपर्क प्रमुख डॉ. बुद्धदेव शर्मा, भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष कुसुम कंडवाल, सरोज डिमरी, कपिल गुप्ता, दीपक भट्ट, अश्वनी गुप्ता आदि ने भी संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए सभी विद्वानों से एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया। सम्मेलन में वैदिक वांड्गमय की विभिन्न शाखाओं पर आधारित प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। संस्कृत छात्रों ने संस्कृत भाषा में गीत, नृत्य व नाटिका का मंचन भी किया। संस्कृत भारती के विभाग संयोजक डॉ. संजू प्रसाद ध्यानी व शांति प्रसाद मैठाणी ने कार्यक्रम का संचालन किया। मौके पर कार्यक्रम संयोजक डॉ. ओमप्रकाश पुर्वाल, सुशील कुमार नौटियाल, शिव कुमार मालवीय, जनार्दन कैरवान, सुभाष डोभाल, शारदा कपूर, सुलभा चोपड़ा, प्रियंका रावत, कुसुम राणा, शिवानी रावत, पूनम, कैलाश व्यास, सर्वेश तिवारी, विश्वजीत बहुगुणा आदि संस्कृत विद्वान उपस्थित रहे।

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