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Rishikesh Best Waterfalls: झट से बना लीजिए ऋषिकेश घूमने का प्लान, ये 5 खूबसूरत झरने भर देंगे तन-मन में ताजगी

अगर आप भी गर्मी से परेशान हो गए हैं और सुकून की तलाश कर रहे हैं तो ऋषिकेश की तरफ आ सकते हैं। यहां कई-कई फीट की ऊंचाई से पहाड़ की गोद में गिरती इन जल धाराओं का स्पर्श जहां तन-मन को ताजगी से भर देता है वहीं देखना रोमांच की अलग ही अनुभूति कराता है। खबर में हमने तीर्थनगरी के टॉप पांच झरनों के बारे में बताया है।

By Jagran News Edited By: Aysha Sheikh Fri, 21 Jun 2024 07:04 PM (IST)
ऋषिकेश के 5 खूबसूरत झरने भर देंगे तन-मन में ताजगी - जागरण

गौरव ममगाईं, ऋषिकेश। गर्मी के इस मौसम में अगर आप सुकून के साथ तन और मन को ताजगी से भरना चाहते हैं तो उत्तराखंड के ऋषिकेश चले आइए। विश्वभर में योग और गंगा के लिए प्रसिद्ध इस तीर्थनगरी में झर-झर झरते झरनों का फेनिल संसार भी सैलानियों का बाहें फैलाए स्वागत करता है। कई-कई फीट की ऊंचाई से पहाड़ की गोद में गिरती इन जल धाराओं का स्पर्श जहां तन-मन को ताजगी से भर देता है, वहीं इनको करीब से देखना रोमांच की अलग ही अनुभूति कराता है।

साथ ही इनकी बूंदों से उत्पन्न होने वाला संगीत भी प्रकृति के बीच होने का एहसास कराता है। तीर्थनगरी में ऐसे पांच झरने हैं, जहां ग्रीष्मकाल में पर्यटकों का तांता लगा रहता है। ये झरने दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ व उत्तर प्रदेश ही नहीं, विदेश से आने वाले सैलानियों की भी पहली पसंद बन चुके हैं। ...तो देर किस बात की है बैग पैक कीजिए और इससे पहले जान लीजिए इन झरनों के बारे में।

नीर गड्डू: नरेंद्र नगर वन रेंज में स्थित इस क्षेत्र की नैसर्गिक सुंदरता मन मोह लेती है। यहां कुछ ही दूरी पर दो झरने हैं और दोनों में स्वीमिंग पूल बना है। इस पूरे क्षेत्र को प्रकृति के अनुकूल विकसित किया गया है। इससे हर कदम पर प्रकृति के बीच होने का एहसास होता है। झरनों के आसपास लगाई गई कुर्सी-मेज को भी प्रकृति के अनुरूप सजाया-संवारा गया है।

ऋषिकेश-बदरीनाथ मार्ग पर तपोवन से करीब तीन किमी की दूरी पर नीर गड्डू (नीर गढ़) झरने का प्रवेश द्वार है। यहां से टिकट लेकर झरने तक पहुंचने के लिए करीब दो किमी चलना पड़ता है। इसके लिए सड़क और पैदल दो मार्ग हैं। सड़क से दोपहिया और कार जा सकती है। पैदल मार्ग से झरने तक पहुंचने के लिए 15 से 20 मिनट की चढ़ाई तय करनी पड़ती है, जो कि ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए अच्छा विकल्प है। पहले से लगभग पांच मिनट की पैदल दूरी पर दूसरा झरना है।

नीर गड्डू झरना ट्रेक से गुजरते पर्यटक। साभार वन विभाग

हिम शैलः स्वर्गाश्रम क्षेत्र के पास स्थित यह झरना जंगल के बीचों-बीच है। यह शांतिपूर्ण स्थल अध्यात्म के लिए उपयुक्त है। झरने से कुछ ही दूरी पर एक प्राचीन गुफा भी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यहां ऋषि तात बाबा ने लंबे समय तक साधना की। यहां पहुंचने के लिए पहले लक्ष्मण झूला को पार कर नीलकंठ रोड पर पहुंचना होता है, जो ऋषिकेश से चार किमी की दूरी पर है। यहां से झरना करीब चार किमी आगे है।

हिमशैल झरना। साभार वन विभाग

गरुड़ चट्टी: यह झरना छोटा है, लेकिन आसपास का प्राकृतिक सुंदरता मनोहारी है। यही वजह है कि देशी-विदेशी पर्यटक इस झरने की तरफ खिंचे चले आते हैं। समीप ही भगवान गरुड़ का प्राचीन मंदिर भी है। मान्यता है कि इस स्थल पर भगवान गरुड़ ने वास किया था, इसी कारण इसका नाम गरुड़ चट्टी पड़ा। यह झरना नीलकंठ मंदिर के समीप है। यहां भी लक्ष्मण झूला पार कर नीलकंठ रोड से पहुंचा जाता है। लक्ष्मण झूला ऋषिकेश से करीब चार किमी की दूरी पर है, जबकि नीलकंठ मंदिर लगभग 30 किमी।

गरुड़ चट्टी झरना। साभार वन विभाग

पटना: यह झरना भी नीलकंठ रोड क्षेत्र में है, जो राजाजी राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आता है। यह झरना अत्याधिक ऊंचा है और इसकी जल धाराएं हवा के साथ उड़ती प्रतीत होती हैं। शांतिप्रिय पर्यटकों के लिए यह उपयुक्त स्थल है। यहां पहुंचने के लिए लक्ष्मण झूला पुल पार करने के बाद नीलकंठ रोड पर करीब तीन किमी चलना पड़ता है। गरुड़ चट्टी झरने से इसकी दूरी करीब तीन किमी है, जिसे 15 मिनट में पैदल तय किया जा सकता है।

पटना झरना। साभार वन विभाग

फूल चट्टी: यह झरना नीलकंठ मार्ग पर नीरगढ़ और गरुड़ चट्टी के मध्य स्थित है। यहां जलधारा चट्टानों से होते हुए सर्पीली धारा में बदलती है, जिससे पानी चारों दिशाओं में गिरता है। यह झरना नीलकंठ रोड पर करीब साढ़े चार किमी की दूरी पर है। पैदल ट्रेक मुख्य मार्ग से करीब 20 मिनट का है। यह ट्रेक गीला और फिसलन से भरा है, ऐसे में बच्चे व वृद्धों को खास सावधानी बरतने की जरूरत रहती है।

फूल चट्टी झरना। साभार वन विभाग

ट्रेकिंग का भी लुत्फ

ट्रेकिंग के शौकीन पर्यटकों के लिए ये झरने किसी दिव्य स्थान से कम नहीं, क्योंकि यहां पहुंचने के लिए ट्रेकिंग का मौका भी मिलता है। ये सभी झरने मुख्य सड़क से एक से पांच किमी तक की दूरी पर हैं, जो पैदल तय करनी पड़ती है। इस रास्ते में सैलानी प्रकृति के मनोहारी दृश्यों में खो जाते हैं।

इन स्थानों की कर सकते हैं सैर

ऋषिकेश आ ही रहे हैं तो लक्ष्मण झूला, राम झूला, परमार्थ निकेतन, त्रिवेणी घाट, स्वर्गाश्रम, नीलकंठ महादेव मंदिर, चौरासी कुटिया, राजाजी राष्ट्रीय पार्क जैसे आध्यात्मिक एवं पर्यटन स्थलों की सैर भी कर सकते हैं। ये सभी स्थान ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्र में ही हैं, जहां से कुछ ही घंटे में वापस ऋषिकेश लौटा जा सकता है।

सड़क, रेल और हवाई मार्ग से ऐसे पहुंचें ऋषिकेश

अगर आप रेल मार्ग से ऋषिकेश आना चाहते हैं तो देश की राजधानी दिल्ली से कई ट्रेन नियमित रूप से संचालित होती हैं। सड़क मार्ग से आने वाले पर्यटक दिल्ली के आइएसबीटी कश्मीरी गेट व अन्य स्टाप से करीब पांच घंटे में ऋषिकेश पहुंच सकते हैं। दिल्ली सहित कई महानगरों से देहरादून एयरपोर्ट के लिए हवाई सेवा संचालित होती हैं। यहां से ऋषिकेश 10 किमी की दूरी पर है।

खान-पान की व्यवस्था

राजाजी टाइगर रिजर्व के कोर जोन में होने के कारण झरनों के आसपास आपको खानपान के नाम पर कोई खास व्यवस्था नहीं मिल पाएगी, लेकिन मुख्य मार्ग और ऋषिकेश शहर में खाने-ठहरने की बेहतरीन व्यवस्थाएं हैं। तपोवन के निकट स्थित नीर गड्डू (नीरगढ़) झरने के पास जरूर भोजन, शीतल पेय, चाय, मैगी आदि की कुछ दुकानें हैं।

ऋषिकेश के झरने भी देश-दुनिया में पहचान बना रहे हैं। इन पांचों झरनों में हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। इसमें पांच हजार से ज्यादा विदेशी पर्यटक होते हैं। नीर गढ़ झरना सर्वाधिक पसंद किया जाता है। इसका कारण है कि यहां पर्यटक सुविधाओं का लगातार विकास हो रहा है। पिछले एक महीने में नीर गढ़ झरने में 20 हजार से ज्यादा पर्यटक आ चुके हैं, इनमें 500 से ज्यादा विदेशी हैं। -विवेक जोशी, वन क्षेत्राधिकारी, नरेंद्रनगर रेंज