Dehradun News: ट्रेन की चपेट में आने से हाथी के बच्चे की मौत, आधे घंटे ठप रहा रेल संचालन
रायवाला के पास हरिद्वार-ऋषिकेश रेल मार्ग पर उपासना एक्सप्रेस से टकराकर एक हाथी के बच्चे की मौत हो गई। घटना ...और पढ़ें

हरिद्वार क्षेत्र में हाथी की ट्रेन की चपेट में आने से मौत के बाद रायवाला जंक्शन पर रोकी गयी ट्रेन।
HighLights
हरिद्वार से ऋषिकेश जा रही उपासना एक्सप्रेस के सामने आया हाथियों का झुंड
लोको पायलट और सहायक लोको पायलट के विरुद्ध मुकदमा दर्ज
संवाद सूत्र, जागरण, रायवाला (देहरादून): हरिद्वार से ऋषिकेश जा रही हावड़ा-दून (उपासना) एक्सप्रेस की चपेट में आने से हाथी के बच्चे की मौत हो गई। हादसा मोतीचूर-रायवाला स्टेशन के बीच राजाजी टाइगर रिजर्व की हरिद्वार रेंज में हुआ। इससे हरिद्वार-देहरादून और हरिद्वार-ऋषिकेश रेल खंड पर यातायात प्रभावित हुआ। उपासना एक्सप्रेस व देहरादून से आनंद विहार जा रही वंदे भारत ट्रेन को करीब आधा घंटा रायवाला स्टेशन रोका गया। इस मामले में ट्रेन के लोको पायलट खुशीराम मौर्य और सहायक लोको पायलट दीपक कुमार के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
हादसा सोमवार सुबह करीब साढ़े छह बजे हुआ। हाथियों का झुंड राजाजी टाइगर रिजर्व के बीच से गुजर रहे रेलवे ट्रैक को पार कर रहा था। इसी बीच हावड़ा-दून एक्सप्रेस (13009) आ गई। हाथियों ने तो रेलवे ट्रैक पार कर लिया था, लेकिन झुंड में साथ चल रहा एक छोटा हाथी ट्रेन की चपेट में आ गया। वन्यजीव प्रतिपालक अजय लिंगवाल ने बताया कि मरने वाले हाथी की उम्र करीब छह से आठ वर्ष है। राजाजी टाइगर रिजर्व के बीच से गुजर रहा रेलवे ट्रैक कई मतर्बा हाथियों के लिए जानलेवा साबित हुआ है। हरिद्वार-देहरादून के बीच स्थित इस ट्रैक पर 42 वर्ष में 34 हाथी काल का ग्रास बन चुके हैं।
38 वर्ष में 33 हाथी बने काल का ग्रास
राजाजी टाइगर रिजर्व के बीच से गुजर रहा रेलवे ट्रैक कई मतर्बा हाथियों के लिए जानलेवा साबित हुआ है। वन विभाग और रेलवे में सामंजस्य न होने से हाथी अपनी जान गवां रहे हैं। हरिद्वार-देहरादून के बीच स्थित इस ट्रैक पर बीते 38 वर्ष में 33 हाथी काल का ग्रास बन चुके हैं। सोमवार सुबह हुई घटना ने एक बार फिर सुरक्षा दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- इससे पूर्व 19 सितंबर 2023 को हरिद्वार क्षेत्र में सीतापुर फाटक के पास एक नर हाथी की ट्रेन से टकराकर मौत हो गई थी।
- वर्ष 2021 में दो हाथियों ने ट्रेन की चपेट में आकर जान गंवाई। जिनमें एक घटना आठ मार्च को लच्छीवाला के पास हुई जिसमें शिशु हाथी की मौत व दूसरी घटना 27 नवंबर को हुई थी।
- 2020 में 27 जुलाई को नकरौंदा के पास और फिर 21 नवंबर को हर्रावाला के पास रेलवे ट्रैक एक हाथी के लिए काल साबित हुआ है।
- 15 अक्टूबर 2016 को नंदा देवी एक्सप्रेस से रायवाला के पास और 19 अप्रैल 2017 में ज्वालापुर के पास दो टस्कर हाथी ट्रेन से कट गए थे।
- फरवरी 2018 में रायवाला के पास ट्रेन की चपेट में आने से हाथियों के झुंड में शामिल शिशु हाथी व 20 मार्च को मादा हाथी की मौत हो गई थी।
- आंकड़े बताते हैं कि इससे पहले 2001 में चार हाथियों को ट्रेन ने चपेट में लिया था। 1983 में पार्क बनने से लेकर अब तक इस ट्रैक पर 33 हाथियों की जान जा चुकी है। हालांकि देहरादून-हरिद्वार के बीच वर्ष 2023 के बाद ट्रेन से टकराकर शिशु हाथी की मौत की सोमवार को हुई यह इस वर्ष की पहली घटना है।
गलियारे से ही चौकसी गायब
जिस जगह ज्यादातर घटनाएं हुई वह हाथियों का परंपरागत वन्यजीव गलियारा है। सोमवार सुबह जिस जगह घटना हुई वहां अक्सर हाथियों का मूवमेंट रहता है। जाहिर सी बात है कि यहां से गुजर रहे रेलवे ट्रैक पर राजाजी पार्क प्रशासन को अतिरिक्त चौकसी बढ़ानी चाहिए, ताकि वन्य जीव सुरक्षित रेल ट्रैक पार कर सकें, लेकिन धरातल पर ऐसा कुछ नहीं है।
