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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 13, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

तीरथ सिंह रावत सरकार के मंत्रिमंडल में स्थान पाने को नहीं लगी दिल्ली दौड़

By Sunil NegiEdited By:
Published: Sat, 13 Mar 2021 09:22 AM (IST)Updated: Sat, 13 Mar 2021 06:27 PM (IST)

इसे पार्टी हाईकमान के सख्त रुख का असर कहें या फिर सालभर बाद होने वाले विधानसभा चुनाव का बात चाहे ...और पढ़ें

समारोह में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा व पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का अभिवादन करते मुख्यमंत्री तीरथ ।
समारोह में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा व पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का अभिवादन करते मुख्यमंत्री तीरथ ।

राज्य ब्यूरो, देहरादून। इसे पार्टी हाईकमान के सख्त रुख का असर कहें या फिर सालभर बाद होने वाले विधानसभा चुनाव का, बात चाहे जो भी हो, लेकिन भाजपा सरकार में नेतृत्व परिवर्तन के बाद मंत्री पद के लिए इस बार विधायकों में दौड़ कहीं नजर नहीं आई। न किसी ने दिल्ली की ओर रुख किया और न बड़े नेताओं की परिक्रमा ही की।

आमतौर पर देखा जाता है कि किसी दल की सरकार बनने की स्थिति में मंत्री पदों के लिए दौड़-धूप शुरू हो जाती है। हर बार ही यह क्रम चलता है। पिछले सालों की तरह इस बार प्रदेश की भाजपा सरकार में नेतृत्व परिवर्तन हुआ तो ऐसा नजारा कहीं नजर नहीं आया। दरअसल, प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई भाजपा सरकार में चार साल में नेतृत्व परिवर्तन के पार्टी हाईकमान के फैसले से हर कोई सहमा हुआ था। ऐसे में माना जा रहा था कि यदि किसी ने मंत्री पद के लिए दिल्ली दौड़ लगाई तो दांव उल्टा पड़ सकता है। अगले साल विधानसभा चुनाव भी हैं, ऐसे में जरा सी चूक भारी पड़ सकती है। शायद यही वजह रही कि मंत्री पद के लिए न तो किसी ने दबाव बनाया और न दिल्ली दौड़ ही लगाई। पार्टी हाईकमान ने जिसके नाम की मुहर लगाई, उसे ही मंत्री पद मिला।

त्रिवेंद्र की पसंद का भी ध्यान

तीरथ मंत्रिमंडल में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की पसंद का भी ध्यान रखा गया है। यह इससे साबित होता है कि त्रिवेंद्र सरकार में शामिल रहे सभी कैबिनेट व राज्यमंत्रियों को तीरथ मंत्रिमंडल में भी इन्हीं ओहदों के साथ जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही संतुलन और समन्वय का भी प्रयास किया गया।

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