देहरादून, अंकुर शर्मा। अब एक क्लिक पर ही जल संस्थान की सभी संपत्तियां दिखाई देंगी। बता दें कि संस्थान की संपत्तियां स्टैंड पोस्ट, नलकूप, ओवरहेड टैंक यहां तक कि कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं आदि की भी जियो टैगिंग की जा रही है। इसका मकसद डाटा कलेक्शन करना भी है। 

केंद्र ने जल संस्थान को संपत्ति की जियो टैगिंग कराने के निर्देश दिए। इसके बाद संस्थान ने जियो टैगिंग का काम शुरू कर दिया है। अभी होता यह है कि संस्थान की संपत्तियां जैसे स्टैंड पोस्ट, ओवरहेड टैंक, नलकूप, पंप हाउस, दफ्तर आदि का कागजों में तो रिकॉर्ड मौजूद है। लेकिन हकीकत में ये अस्तित्व में हैं या नहीं इसकी जानकारी नहीं होती है।

दूसरा, जीवन के लिए सबसे जरूरी पानी की आपूर्ति करने वाले जल संस्थान पर उपभोक्ताओं आदि का सटीक डाटा भी नहीं होता है। इस वजह से 30 या 50 साल बाद की पेयजल योजना बनाने में खासी परेशानी होती है। इस समस्या से निजात के लिए जियो टैगिंग की जा रही है। सिर्फ पुरानी बिछी पेयजल लाइनों की जियो टैगिंग नहीं की जाएगी। शुरुआती चरण में देहरादून के ग्रामीण इलाकों में जियो टैगिंग की जाएगी। इस बाबत निविदा प्रक्रिया हो रही है। निविदा पूरी होते ही टैगिंग का काम शुरू हो जाएगा। 

शहर में अब हर काम की होगी जियो टैगिंग 

दून शहर में अब जहां भी पाइप लाइन बिछाने, पंप हाउस, ओवरहेड बनाने, उपभोक्ताओं को कनेक्शन देने का काम होगा वहां जियो टैगिंग की जाएगी। फिर यह काम कोई भी संस्था (एडीबी, अमृत, पेयजल निगम) कर रही हो। 

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ये होंगे फायदे 

- ऑनलाइन संपत्ति दिखाई देंगी 

- उपभोक्ताओं, संपत्ति का सटीक ब्योरा होगा 

- सटीक डाटा बैंक तैयार करने में मिलेगी मदद 

- नई पेयजल योजनाओं के  निर्माण के लिए उपलब्ध होंगे आंकड़े  

जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक एसके शर्मा ने बताया कि जल संस्थान की संपत्तियों की जियो टैगिंग की जा रही है, शुरुआत ग्रामीण इलाकों से होगी। शहर में सभी नए काम की भी टैगिंग होगी। 

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Posted By: Raksha Panthari

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