देहरादून, जेएनएन। अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के पैकज निजी चिकित्सकों को नहीं भा रहे हैं। उनका कहना है कि पैकेज में निर्धारित रेट खर्च के मुकाबले काफी कम हैं। इस कारण योजना से जुड़े रहना मुश्किल हो रहा है। बहरहाल योजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि केंद्र ने हाल ही में पैकेज रेट रिवाइज किए हैं। इसमें भी यदि कहीं कमी रहती है तो प्रस्ताव राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण को भेजा जाएगा। 

अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना को लेकर राजपुर रोड स्थित मंथन सभागार में कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें संबद्ध निजी अस्पतालों से योजना पर फीडबैक लिया गया। कई निजी अस्पतालों ने योजना के पैकेज को लेकर आपत्ति दर्ज कराई। 

कहा कि सरकार ने आयुष्मान के जरिये उन्हें गरीबों की सेवा का मौका दिया है। उसके बदले पैसा मिल रहा है तो और भी अच्छा है। कुछ फीसदी लोगों को कम रेट पर उपचार देने में उन्हें भी संकोच नहीं है। पर उत्तराखंड में यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के तहत सभी परिवार इस योजना में शामिल किए जा रहे हैं। ऐसे में अस्पतालों पर अत्याधिक लोड पड़ेगा। इस दिक्कत को समय रहते दूर किया जाना चाहिए और उसी अनुरूप पैकेज निर्धारित किए जाएं।  इस दौरान योजना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरणेन्द्र चौहान, निदेशक प्रशासन डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, निदेशक मेडिकल क्वालिटी डॉ. अर्चना श्रीवास्तव समेत कई निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। 

इलाज की दरें बढ़ी, कम होगी दिक्कत 

अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के अध्यक्ष डीके कोटिया ने बताया कि आयुष्मान भारत में इलाज की दरें बढ़ा दी गई हैं। वर्तमान में लागू 1392 तरह की जांच, प्रोसीजर और सर्जरी में से 554 को हटाया गया है। 237 नई जांच, प्रोसीजर और सर्जरी जोड़ी गई हैं। सरकार ने 270 तरह की सर्जरी और जांचों की कीमत बढ़ाई है। इनमें 10 से 60 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर दी है। पैकेज रेट रिवाइज होने के बाद निजी अस्पतालों को दिक्कत नहीं आएगी। 

अब हर तरह के कैंसर का इलाज 

आयुष्मान भारत के तहत अब हर तरह के कैंसर का इलाज हो पाएगा। अभी तक कुछ ही प्रकार के कैंसर का उपचार संभव था, लेकिन पिछले एक वर्ष से चल रहे मंथन के बाद सरकार ने स्तन, गर्भाशय, प्रोस्टेट, आंत, पेट इत्यादि के कैंसर को भी अब पैकेज में शामिल कर लिया है। 

क्लेम रिजेक्ट होने पर रिव्यू का अधिकार 

प्री ऑथ अप्रूवल (योजना के तहत अनुमति) या क्लेम रिजेक्ट होने की स्थिति में अस्पताल रिव्यू में जा सकता है। निजी अस्पतालों द्वारा समस्या उठाने पर इसकी विस्तृत जानकारी उन्हें दी गई। बताया गया कि वह इस संबंध में योजना के सीईओ को ayushmanuttarakhand@gmail.com पर मेल फॉरवर्ड कर सकते हैं। जिसका निस्तारण एक सप्ताह के भीतर किया जाएगा।

अनस्पेसिफाइड पैकेज का अर्थ समझाया

अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के तहत डेंगू के मरीजों को निजी अस्पतालों में मुफ्त उपचार की सुविधा दी गई है। पर इसमें कुछ तकनीकी दिक्कतें भी आ रही हैं। कार्यशाला के दौरान ही निजी चिकित्सकों ने कहा कि कई मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता होती है। 

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प्लेटलेट्स का जंबो पैक 12 हजार रुपये तक पड़ रहा है। ऐसा क्या किया जाए कि मरीज पर आर्थिक भार ना पड़े। जिस पर निदेशक मेडिकल क्वालिटी डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने बताया कि इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए ही मेडिकल में एड ऑन पैकेज व सर्जिकल केस में अनस्पेसिफाइड पैकेज की व्यवस्था है। प्री ऑथ अप्रूवल लेकर इसका फायदा मरीजों को दिया जा सकता है।

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Posted By: Bhanu

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