देहरादून, जेएनएन। अगर आप राज्य की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर देखना चाहते हैं तो किसी दुरूह क्षेत्र में जाने की जरूरत नहीं। राजधानी का ही हाल देख लीजिए। इसे देख आप सहज ही यह अंदाजा लगा लेंगे कि पहाड़ के दुर्गम क्षेत्रों में स्थितियां क्या होंगी। दून में आइसीयू की कमी के कारण मरीजों की उखड़ती सांसें स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल रही हैं। आए दिन बड़ी संख्या में मरीजों को लेकर उनके तीमारदार एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भटकते रहते हैं। रात के समय स्थिति अधिक भयावह हो जाती है। ऐसी ही एक घटना फिर हुई है। जहां 35 वर्षीय एक महिला ने आइसीयू की आस में दम तोड़ दिया। 

बता दें, हंसुवाला निवासी आशू जायसवाल डोईवाला चौक पर कपड़े की दुकान चलाते हैं। बीती 14 अक्टूबर को उनकी पत्नी ज्योति की तबीयत बिगड़ गई। जिनका टेस्ट कराने पर चिकित्सकों ने उन्हें डेंगू बताया। उन्हें हिमालयन अस्पताल, जौलीग्रांट में भर्ती कराया गया। पर तीन दिन में उनकी प्लेटलेट्स लगातार गिरती गई। साथ ही सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी। 

इस पर चिकित्सकों ने उन्हें आइसीयू में भर्ती करने की जरूरत बताई। पर अस्पताल के आइसीयू में बेड नहीं मिल पाया। उन्हें सलाह दी गई कि मरीज को दून के किसी बड़े अस्पताल में ले जाएं। जिस पर परिजन मरीज को लेकर एक से दूसरे अस्पताल भटकते रहे पर कहीं भी आइसीयू में बेड खाली नहीं मिला। 

अंत में परिजन जीएमएस रोड स्थित एक अस्पताल में पहुंचे। वहां आइसीयू जरूर मिला, पर एक से दूसरे अस्पताल भटकते मरीज की हालत अत्यंत खराब हो चुकी थी। अस्पताल में भर्ती होने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। 

सरकारी अस्पताल में महज पांच बेड का आइसीयू

प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल तक में आइसीयू कक्ष में बेड की संख्या ऊंट के मुंह में जीरा वाली स्थिति में है। अस्पताल के आइसीयू कक्ष में महज पांच बेड हैं। यह अक्सर फुल रहते हैं। 

सरकारी अस्पतालों में बढ़ेंगे बेड

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके गुप्ता ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या की तुलना में आइसीयू में बेड निश्चित तौर पर बहुत कम हैं। उन्होंने बताया कि दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नए आइसीयू में 21 बेड बढ़ेंगे। इसका निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। जिससे वहां 26 बेड हो जाएंगे। इसी तरह, गांधी शताब्दी अस्पताल और कोरोनेशन अस्पताल में भी क्रमश: चार और तीन बेड का आइसीयू बनने जा रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं के मर्ज ने ली एक और जान

स्वास्थ्य सेवाओं के मर्ज ने एक और जच्चा-बच्चा की जान ले ली है। दून मेडिकल कालेज अस्पताल में पिछले एक सप्ताह से जिंदगी की जंग लड़ रही महिला ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उसके गर्भस्थ शिशु की पहले ही मौत हो गई थी।

बीती 14 अक्तूबर को रायपुर क्षेत्र के खैर मानसिंह गांव निवासी सात माह की गर्भवती शिवानी को दून मेडिकल कालेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग (दून महिला अस्पताल) लाया गया था। परिजनों का आरोप था कि ढाई घंटे तक डाक्टरों ने उसे  देखा तक नहीं। बाद में गंभीर हालत में उसे आइसीयू में भर्ती किया गया। महिला के गर्भस्थ शिशु की भी मौत हो गई थी। 

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परिजनों के अनुसार रविवार को सुबह 11 बजे चिकित्सकों ने उन्हें शिवानी की मौत की जानकारी दी। उनका कहना है चिकित्सक उपचार में देरी नहीं करते तो शायद उसको जान न गंवानी पड़ती। ऐसे चिकित्सकों पर कार्रवाई होनी चाहिये। प्राचार्य डा. आशुतोष सयाना का कहना है कि उपचार में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई है।यह आरोप निराधार हैं। महिला की स्थिति पहले से ही खराब थी। उसे बचाने की पूरी कोशिश की गई।

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Posted By: Bhanu

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