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    देवभूमि में नहीं चलेगी धर्म के नाम पर ठगने वाले ढोंगियों की दुकान, लांच हुआ 'ऑपरेशन कालनेमि'

    Updated: Thu, 10 Jul 2025 02:32 PM (IST)

    उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऑपरेशन कालनेमि शुरू करने के निर्देश दिए हैं। यह अभियान धर्म के नाम पर लोगों को ठगने वाले छद्म भेषधारियों के खिलाफ है। असामाजिक तत्व साधु-संतों का भेष धारण कर महिलाओं को ठग रहे हैं जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। सरकार सनातन संस्कृति और सामाजिक सौहार्द की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और पाखंड फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

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    मुख्‍यमंत्री पुष्‍कर सिंह धामी ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश। फाइल

    राज्‍य व्‍यूरो, देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड में जबरन मतांतरण, लव जिहाद रोकने के लिए कड़ा कानून बना चुके मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अब धर्म का चोला ओढ़कर सनातन को निशाना बना रहे अराजक तत्वों पर नजरें ढेढ़ी की हैं।

    शुक्रवार से कांवड़ यात्रा के साथ ही ‘आपरेशन कालनेमि’ प्रारंभ करने के निर्देश उन्होंने दिए। इस अभियान में साधु-संतों का वेश धर कर आमजन से ठगी और मतांतरण में लिप्त तत्वों पर शिकंजा कसा जाएगा। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि देवभूमि का सरल स्वरूप बिगाड़ने और सनातन धर्म की आड़ लेकर ठगी, मतांतरण और आमजन की भावना से खिलवाड़ करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे।

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    प्रदेश में हाल ही में इस तरह के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें असामाजिक तत्वों ने अपनी असली पहचान छिपाई और साधु-संतों का चोला ओढ़कर आमजन विशेष रूप से महिलाओं को ठगा, साथ में मतांतरण के प्रयास भी किए गए। नाम बदलकर गांवों में रहकर ग्रामीणों की भावना से खिलवाड़ करने के प्रकरण भी देखे गए हैं।

    उत्तर प्रदेश में भी महिलाओं की मजबूरी का फायदा उठाते हुए मतांतरण कराने से संबंधित छांगुर उर्फ जलालुद्दीन का प्रकरण सामने आ चुका है। चारधाम, सिद्धपीठों, प्रमुख धार्मिक स्थलों ने उत्तराखंड को देवभूमि के रूप में आध्यात्मिक पहचान दी है।

    उत्तर प्रदेश में मतांतरण का यह प्रकरण सामने आने के बाद उत्तराखंड में इस प्रकार के किसी भी प्रयास को नहीं होने देने के लिए मुख्यमंत्री धामी ने ‘आपरेशन कालनेमि’ प्रारंभ करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने छद्म वेश धर कर सनातन की छवि को नुकसान पहुंचाने वालों से सख्ती से निपटने को कहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे तत्वों के कारण न केवल आमजन की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं, बल्कि सामाजिक सौहार्द व सनातन की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। ऐसे में किसी भी मत या पंथ का व्यक्ति धर्म का चोला पहनकर आमजन से ठगी, मतांतरण का प्रयास करता हुआ पाया गया तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    उन्होंने कहा कि जिस प्रकार असुर कालनेमि ने साधु का भेष धारण कर हनुमानजी को भ्रमित करने का प्रयास किया, वैसे ही आज भी समाज में कई कालनेमि सक्रिय हैं जो धर्म का वेश धारण कर अपराध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनभावनाओं, सनातन संस्कृति की गरिमा की रक्षा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आस्था के नाम पर पाखंड फैलाने वालों को किसी भी सूरत में नहीं बख्शा जाएगा।

    ‘हमारा प्रदेश देवभूमि है। यहां का जनमानस, निश्छल, और सरल स्वभाव का है। कुछ असामाजिक तत्व इसका लाभ उठाते हुए साधु-संतों का छद्म भेष धारण कर व्यक्तियों को ठगने का काम कर रहे हैं। पुलिस प्रशासन को ऐसे तत्वों की पहचान कर, धरपकड़ के लिए आपरेशन कालनेमि शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।’ -पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री।

    कौन था कालनेमि

    रामचरित मानस के लंका कांड में वर्णित है कि मायावी राक्षस कालनेमि मारीच का पुत्र था। मेघनाद की अमोघ शक्ति से मूर्छित लक्ष्मण के उपचार को संजीवनी लेने जब हनुमान हिमालय जा रहे थे, तब कालनेमि ने उन्हें रोकने के लिए षड्यंत्र रचा। उसने एक पहाड़ी के आसपास सरोवर, बाग व कुटिया का निर्माण किया और साधु वेश धारण कर राम नाम जपने लगा। हनुमान ने यह सब देखा तो उत्सुकतावश वहां रुक गए। कालनेमि ने उनसे सरोवर में स्नान कर थोड़ी देर विश्राम करने का आग्रह किया। उस सरोवर में एक मगरमच्छ था, जिसे कालनेमि ने हनुमान की हत्या करने के लिए कहा था। लेकिन, मगरमच्छ हनुमान के हाथों मारा गया और फिर उसने अप्सरा का रूप धारण कर हनुमान को कालनेमि का रहस्य बताया। तदोपरांत हनुमान ने साधु वेश में छिपे शैतान कालनेमि का वध कर फिर से रामकाज के लिए हिमालय की उड़ान भरी।