देहरादून, जेएनएन। उत्तराखंड में चार धाम यात्रा अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। मंगलवार को शीतकाल के लिए केदारनाथ धाम के कपाट भी बंद कर दिए गए, लेकिन इस बार यात्रा कई मायनों में खास रही। यात्रा सीजन में रिकार्ड दस लाख श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए। श्रद्धालुओं के सैलाब से श्री बदरी-केदार मंदिर समिति में भी उत्साह है। समिति को 16 करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई।

रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल केदारनाथ यात्रा में उमड़े श्रद्धालुओं के सैलाब से उत्साहित हैं। वह बताते हैं कि प्रशासन ने यात्रा को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में आए सैलाब के बाद यहां व्यापारियों और आम जनता में मायूसी का आलम था, लेकिन वर्ष 2014 में केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्य शुरू होने के बाद हालात में खासा बदलाव आया। 

इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी करीब-करीब हर साल केदारनाथ यात्रा पर आए और देश-विदेश में इसका अच्छा संदेश गया। इस बार हेली सेवाओं ने भी 84 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। एक लाख सात हजार श्रद्धालु हेली सेवा के जरिये केदारनाथ पहुंचे। 

यात्रा का उत्साह श्रद्धालुओं में इस कदर था कि 16 जून को एक ही दिन में 36 हजार लोगों ने बाबा केदार के दर्शन किए। यह भी एक रिकार्ड है। यात्रियों के सैलाब से घोड़-खच्चर संचालकों के चेहरे खिले रहे। साढ़े चार लाख से अधिक यात्रियों ने घोड़े-खच्चरों से केदारनाथ की यात्रा की और करीब 94 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ।

केदारनाथ के तीर्थपुरोहित श्रीनिवास पोस्ती कहते हैं कि आपदा के बाद जिस तरह इस वर्ष देश विदेशी यात्रियों का हुजूम उमड़ा है वह आने वाले वक्त के लिए एक नई उम्मीद है। केदारसभा के महामंत्री शंकर बगवाड़ी कहते हैं कि केदारनाथ में आपदा के बाद यात्रा पूरे रंग में रही। 

छह वर्ष में केदारनाथ पहुंचे यात्री

वर्ष-------------------श्रद्धालु

2014------------42000

2015------------109000

2016------------309000

2017------------471000

2018------------732000

2019-----------10,00021

कपाट बंद होने से दोनों धामों में पसरा सन्नाटा

गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होते ही दोनों धामों में सन्नाटा छा गया है। यात्रा सीजन के दौरान तीर्थयात्रियों व पर्यटकों से गुलजार रहने वाले धाम परिसरों में कपाट बंद होने के बाद से वीरानी छा गई। दोनों धामों में अब छह माह बाद अक्षय तृतीया को कपाट खुलने के बाद ही रौनक लौट सकेगी।

शीतकाल में कुछेक साधु संत ही गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में रहते हैं। सोमवार को गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद यहां पहुंचे तीर्थयात्री अपने-अपने गंतव्यों को लौट गए। वहीं यात्रा सीजन में यहां व्यवसाय करने पहुंचे व्यवसायियों ने भी कपाट बंद होते ही अपना-अपना सामान बांध कर अपने घरों को लौट गए। 

इससे गंगोत्री धाम के मंदिर परिसर, गंगा तटों, स्नान घाटों तथा बाजार की गलियों ने पूरी तरह सन्नाटा पसरा पड़ा है। वहीं दूसरी ओर मंगलवार को भैया दूज के पर्व पर यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होते ही यमुनोत्री से लोग वापस अपने गंतव्यों को लौटे, इससे धाम परिसर में सन्नाटा पसर गया है। 

गंगोत्री धाम क्षेत्र सहित यात्रा मार्ग के भैरोघाटी, हर्षिल, धराली, सुक्की, गंगनानी आदि पड़ाओं पर भी सन्नाटा पसरने लगा है। वहीं यमुनोत्री धाम क्षेत्र सहित जानकीचट्टी, फुलचट्टी, हनुमानचट्टी, राना, स्यानाचट्टी आदि प्रमुख यात्रा पड़ावों पर यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होते ही वीरानी छा ने लगी है। 

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यात्रा काल के दौरान ये सभी पड़ाव तीर्थयात्रियों और पर्यटकों से गुलजार रहते हैं। लेकिन अब धीरे-धीरे यह पड़ाव खाली होने लगे हैं। शीतकाल में भारी बर्फबारी से पूरा क्षेत्र बर्फ से ढका रहता है। जिससे यहां तक लोग नहीं पहुंच पाते। छह माह तक कुछ साधु संत ही यहां रहते हैं तथा छह माह बाद अक्षय तृतीया के पर्व पर ही यमुनोत्री व गंगोत्री धाम के कपाट खुलेंगे।

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Posted By: Bhanu

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