एनआइवीएच में छात्राओं से छेड़छाड़, निदेशक से की शिकायत
देहरादून के राजपुर रोड स्थित एनआइवीएच में शिक्षक की ओर से छात्र से छेड़छाड़ मामले को लेकर छात्र और उनके अभिभावकों ने गुरुवार को दूसरे दिन भी जमकर हंगामा काटा।
देहरादून, [जेएनएन]: बिहार के मुजफ्फरपुर और उत्तर प्रदेश के देवधर स्थित बालिका गृहों में यौन उत्पीडऩ की गूंज के बीच अब देहरादून में राष्ट्रीय दृष्टिबाधितार्थ संस्थान (एनआइवीएच) कठघरे में है। यहां के छात्र-छात्राओं ने निदेशक को शिकायती पत्र सौंपकर एक शिक्षक पर छेड़छाड़ और प्रबंधन पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। मामले में कार्रवाई न होने से नाराज छात्र-छात्राओं ने कारईवाई की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक पुलिस ऐसी कोई शिकायत न मिलने की बात कही है। इधर, उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इस पर संज्ञान लिया है। प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी गई है। आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी के मुताबिक समिति सोमवार को संस्थान जाकर पड़ताल करेगी।
इस मसले को लेकर एनआइवीएच के छात्र धरने पर बैठे हैं। शुक्रवार सुबह छात्राओं ने सहपाठी छात्रों को साथ लेकर संस्थान की निदेशक अनुराधा डालमिया से मुलाकात कर उन्हें आपबीती सुनाई। छठी से लेकर 11वीं कक्षा तक की छात्राओं ने ने आरोप लगाया कि संस्थान का एक शिक्षक उनके साथ गलत हरकतें करता है। गलत नीयत से छेड़छाड़ करता है। इतना ही नहीं, गल्र्स हॉस्टल में बाहर से कुछ असामाजिक तत्व आते हैं, वे सुरक्षा गार्डों के साथ मिलकर छात्राओं पर अभद्र टिप्पणियां करते हैं। उन्होंने हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था और खाने की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। छात्र-छात्राओं का आरोप है कि संस्थान की निदेशक शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रही हैं।
जांच के बाद ही कार्रवाई
इस बारे में संपर्क करने पर संस्थान की निदेशक अनुराधा डालमिया शिकायती पत्र मिलने की पुष्टि की। उनका कहना है कि छात्र-छात्राओं की ओर से मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की जा रही है, जो संभव नहीं है। शिकायती पत्र में जो बिंदु उठाए गए हैं उनकी जांच के बाद ही कार्रवाई होगी। उन्होंने यह तक कहा कि कुछ शिक्षक व अभिभावक राजनीतिक हित साधने के लिए छात्रों को भ्रमित कर रहे हैं। जहां तक जायज समस्याओं का सवाल है, उन्हें तुरंत दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
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