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    NH 74 Scam : अफसरों ने मिलीभगत कर अपात्रों को बांटा था करोड़ों का मुआवजा, आठ PCS को माना गया दोषी

    Updated: Fri, 27 Jun 2025 03:07 PM (IST)

    उत्तराखंड में एनएच-74 घोटाले में अधिकारियों ने मिलीभगत से अपात्र व्यक्तियों को करोड़ों रुपये का मुआवजा बांटा। यह घोटाला 2017 में सामने आया था, जिसमें लगभग 250-400 करोड़ रुपये की अनियमितता पाई गई। एसआईटी और ईडी ने जांच की, जिसमें कई पीसीएस अधिकारियों और अन्य लोगों को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में जेल भेजा गया। अधिकारियों ने कृषि भूमि को अकृषक दिखाकर अधिक मुआवजा हड़पा था। ईडी ने 8 करोड़ रुपये के धन शोधन का आरोप लगाया है।  

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    जागरण संवाददाता, देहरादून। उत्तराखंड के सबसे बड़े एनएच-74 घोटाले में मुआवजे की राशि की जमकर बंदरबांट हुई। अफसरों ने मिलीभगत से अपात्र व्यक्तियों को करोड़ों रुपये की मुआवजा राशि वितरित कर दी। यह घोटाला वर्ष 2017 में त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार बनने के तत्काल बाद सामने आया था।

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    प्राथमिक जांच में राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण में मुआवजा राशि आवंटन में तकरीबन 250 करोड़ के घोटाले की आशंका जताई गई। आयुक्त कुमाऊं की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर मार्च 2017 में तत्कालीन सरकार ने आठ पीसीएस अधिकारियों को प्रथम दृष्ट्या दोषी माना।

    इनमें से सात पीसीएस अधिकारियों तीरथ पाल सिंह, अनिल शुक्ला, डीपी सिंह, नंदन सिंह नगन्याल, भगत सिंह फोनिया, सुरेंद्र सिंह जंगपांगी और जगदीश लाल को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद घोटाले की जांच एसआइटी को सौंपी गई। एसआइटी ने भी घोटाले की पुष्टि कर और अधिकारियों व किसानों समेत 30 से अधिक लोगों को जेल भेजा।

    इस प्रकरण में दो आइएएस अधिकारी भी निलंबित हुए थे, जिन्हें बाद में शासन ने क्लीन चिट दे दी। राष्ट्रीय राजमार्ग घोटाले में जब ईडी ने जांच की तो पीसीएस अफसर डीपी सिंह, सेवानिवृत्त पीसीएस अफसर भगत सिंह फोनिया समेत आठ के खिलाफ मनी लांड्रिंग का एक और केस दर्ज किया गया। सभी आरोपितों पर करीब आठ करोड़ रुपये के धन शोधन (मनी लांड्रिंग) का आरोप है।

    ईडी ने पांच अगस्त 2022 को पीसीएस अफसर डीपी सिंह, पूर्व एसडीएम काशीपुर दिनेश भगत सिंह फोनिया, पूर्व तहसीलदार मदन मोहन पाडलिया, एक कंपनी फाइबरमार्क्स पेपर्स प्राइवेट लिमिटेड, इस कंपनी के अधिकारी जसदीप सिंह गोराया और हरजिंदर सिंह के खिलाफ मनी लांड्रिंग के आरोप में चार्जशीट दाखिल की थी।

    इस पर स्पेशल ईडी कोर्ट ने संज्ञान लिया है। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद इन सभी आरोपितों पर 7.99 करोड़ रुपये का प्रोसीड आफ क्राइम (पीओसी) साबित हुआ है। इन आरोपितों ने किसानों की जमीन खरीद-फरोख्त और इसके मूल्य निर्धारण में अनियमितताएं कर इस रकम का मनी लांड्रिंग में उपयोग किया।

    क्या था एनएच-74 हाईवे घोटाला ऊधमसिंह नगर से गुजरने वाले नेशनल हाईवे-74 के फोरलेन बनने के कारण किसानों की सैकड़ों एकड़ जमीन इसकी जद में आ गई थी। इसमें अधिकारियों ने किसानों से मिलीभगत कर फर्जी तरीके से बड़ी संख्या में कृषि भूमि को अकृषक यानी 143 में दिखाकर करोड़ों रुपये का मुआवजा हड़प लिया था। इस घोटाले की जांच के लिए 2017 में प्रदेश सरकार ने एसआइटी गठित की थी। एसआइटी की जांच में करीब 400 करोड़ रुपये घोटाले की बात सामने आई थी।