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    NCW Report: देश के 31 शहरों में से सबसे असुरक्षित शहरों में शामिल देहरादून, दिन और रात में सुरक्षा की अलग तस्वीर

    Updated: Sun, 31 Aug 2025 01:23 PM (IST)

    एनसीडब्ल्यू की रिपोर्ट के अनुसार देहरादून महिलाओं के लिए असुरक्षित शहरों में शामिल है। रिपोर्ट में शहर का स्कोर राष्ट्रीय औसत से कम रहा। दिन में कुछ महिलाएं सुरक्षित महसूस करती हैं लेकिन रात में असुरक्षा बढ़ जाती है। सर्वेक्षण में सार्वजनिक परिवहन में उत्पीड़न की घटनाएं सामने आईं। असुरक्षा के कारणों में लोगों का व्यवहार और अपराध दर शामिल हैं।

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    एनसीडब्ल्यू रिपोर्ट में सबसे असुरक्षित शहरों में शामिल। प्रतीकात्‍मक

    जासं, देहरादून। राजधानी देहरादून महिलाओं की सुरक्षा के मामले में देशभर में शर्मनाक स्थिति में पहुंच गया है। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्‍ल्‍यू) द्वारा जारी नेशनल एनुअल रिपोर्ट एंड इंडेक्स (एनएआरआइ) 2025 में देहरादून को देश के 31 शहरों में से सबसे असुरक्षित शहरों की सूची में शामिल किया गया है। रिपोर्ट में देहरादून का स्कोर 60.6 प्रतिशत रहा, जो राष्ट्रीय औसत 64.6 प्रतिशत से कम है।

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    रिपोर्ट में देहरादून का नाम रायपुर, चेन्नई और शिलांग जैसे शहरों के साथ जोड़ा गया है, जबकि पड़ोसी हिमालयी शहर शिमला ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए देशभर में 11वां स्थान हासिल किया। वहीं नागालैंड की राजधानी कोहिमा सबसे सुरक्षित शहर बनी, जिसका स्कोर 82.9 प्रतिशत दर्ज हुआ।

    दिन और रात में सुरक्षा की अलग तस्वीर

    रिपोर्ट के मुताबिक, देहरादून की सिर्फ 50 फीसदी महिलाएं शहर को सुरक्षित मानती हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 60 फीसदी है। करीब 41 फीसदी महिलाओं ने सुरक्षा को लेकर तटस्थ राय रखी, वहीं 10 फीसदी ने शहर को असुरक्षित बताया।

    दिन के समय 70 फीसदी महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं, लेकिन जैसे ही रात होती है यह आंकड़ा घटकर 44 फीसदी पर आ जाता है। रात में 33 फीसदी महिलाओं ने तटस्थ राय दी, जबकि 14 फीसदी ने खुद को असुरक्षित बताया।

    ढांचागत सुविधाएं महिलाओं के लिए कमजोर

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि शहर की महिला-हितैषी ढांचागत सुविधाओं को केवल 24 फीसदी महिलाएं सुरक्षित मानती हैं। करीब 45 फीसदी ने इस पर तटस्थ राय दी। हालांकि, पुलिस पर भरोसा थोड़ा बेहतर रहा और 59 फीसदी महिलाएं पुलिस पर भरोसा जताती हैं।

    उत्पीड़न में सार्वजनिक परिवहन सबसे आगे

    सर्वे में महिलाओं ने सबसे ज्यादा मौखिक उत्पीड़न का सामना करने की बात कही, इसके बाद शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न की घटनाएं दर्ज हुईं। 50 फीसदी महिलाओं ने सार्वजनिक परिवहन में उत्पीड़न झेलने की बात कही, जबकि 19 फीसदी को मोहल्लों में और 13 फीसदी को कार्यस्थलों पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।

    चौंकाने वाली बात यह रही कि 40 फीसदी महिलाएं उत्पीड़न झेलने के बावजूद चुप रहीं, सिर्फ 26 फीसदी ने इसकी शिकायत अधिकारियों से की और 19 फीसदी ने दूसरों से मदद मांगी।

    असुरक्षा की वजहें और समाधान

    असुरक्षा महसूस करने की वजह में 26 फीसदी महिलाओं ने शहर के लोगों को जिम्मेदार बताया, 18 फीसदी ने अपराध दर और 11 फीसदी ने सुनसान जगहों को कारण बताया। वहीं सुरक्षा का अहसास कराने में 54 फीसदी ने स्थानीय समुदाय पर भरोसा, 33 फीसदी ने पुलिस गश्त और 18 फीसदी ने कम अपराध दर को कारण बताया।

    महिलाओं ने सुरक्षा सुधार के लिए 45 फीसदी ने पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने, 39 फीसदी ने सड़क लाइट और सीसीटीवी जैसी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और 21 फीसदी ने आत्मरक्षा प्रशिक्षण की मांग की।

    SSP ने गिनाए पुलिस के कदम

    देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अजय सिंह ने कहा कि पुलिस महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि व्यस्त बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर महिला पुलिसकर्मियों के साथ चेकपोस्ट बनाए गए हैं।

    महिला गश्ती दल भी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा शहर में बाहर से आने वाले लोगों का सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। महिलाओं की शिकायत पर त्वरित और उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।