जागरण संवाददाता, देहरादून: पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने इंडियन मेडिसिन फार्मास्युटिकल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आइएमपीसीएल) को निजी हाथों में सौंपे जाने के विरोध में केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि शत-प्रतिशत लाभ देने के बावजूद अल्मोड़ा के समीप मोहान स्थित इस कंपनी की भूमि पर कुछ व्यक्ति अपनी गिद्ध दृष्टि गड़ाए है। वह भविष्य में यहां पर रिसॉर्ट बनाना चाहते हैं। 

पूर्व मुख्यमंत्री ने कंपनी के निजीकरण के विरोध में रविवार को ओल्ड मसूरी रोड स्थित अपने आवास में 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक एक घंटे का मौनव्रत रखा। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से वार्ता में कहा कि मोहान में दशकों पहले आइएमपीसीएल की स्थापना की गई थी। सार्वजनिक क्षेत्र की यह इकाई निरंतर लाभ कमा रही है। कंपनी में यूनानी पद्धति में प्रयुक्त होने वाली औषधियां बनती हैं। प्रदेश के हजारों लोग इन दवाइयों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों के उत्पादन से जुड़े हैं। यही उनकी आजीविका का साधन हैं। कंपनी के निजी हाथों में जाने से ये लोग सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। 

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पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस कंपनी को बेचने का षड्यंत्र लंबे समय से चल रहा था। अब लगता है कि केंद्र सरकार ने भी यह पाप करने का निश्चय कर लिया है। सरकार इस कंपनी को और अधिक बड़े स्वरूप में विकसित करने के बजाय इसकी भूमि को खुर्द-बुर्द करना चाहती है। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार की निजीकरण नीति के कारण आज उत्तराखंड ही नहीं, पूरे देश में नौजवान रोजगार के लिए दर-दर भटक रहे हैं। 

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