खाड़ी देशों में मिसाइलों की गूंज से दून के कई घरों में सन्नाटा, अपनों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
खाड़ी देशों में बढ़ती मिसाइल गतिविधियों के कारण देहरादून और विकासनगर के कई परिवार चिंतित हैं। दुबई और ईरान में ...और पढ़ें

देहरादून में युद्ध की स्थिति पर नजर बनाए बुजुर्ग माता-पिता, इनके बेटा, बहू, पोती और एक साल का पोता इस समय दुबई के जेबेल अली में फंसे हैं। वहीं, ईरान में फंसा विकासनगर का नव विवाहित जोड़ा

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अवनीश चौधरी, देहरादून। खाड़ी देशों के आसमान में जैसे-जैसे मिसाइलों की गूंज बढ़ रही है, वैसे ही देहरादून में कई घरों में सन्नाटा बढ़ता जा रहा है।
ईरान और दुबई में रह रहे अपनों की सुरक्षा को लेकर देहरादून और विकासनगर के कई परिवार चिंता में हैं।
कहीं मासूम के पहले जन्मदिन की खुशियां मिसाइलों के शोर में दब गई हैं, तो कहीं पढ़ाई करने गए नवविवाहित जोड़े की वतन वापसी की राह बंद हो गई है।
केस-1 : दुबई में धमाकों की गूंज से भाऊवाला में बुजुर्ग माता-पिता की चिंता बढ़ी
भाऊवाला की बहुगुणा कालोनी के प्रधान मातबर सिंह बिष्ट और उनकी पत्नी अपने बेटे पंकज के इंतजार में पलकें बिछाए हैं। पंकज दुबई के जेबेल अली में डिस्कवरी गार्डन स्थित एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं।
उनके परिवार में खुशियों का अवसर इसलिए भी बड़ा है क्योंकि इसी महीने में पंकज के बेटे का पहला जन्मदिन है, जिसे मनाने वह सपरिवार देहरादून आने वाले थे। पंकज ने फोन पर बताया कि पिछले तीन दिनों से उनके शहर में युद्ध की गतिविधियां तेज हो गई हैं।
उन्होंने बताया कि दिन में फाइटर जेट्स और फायरिंग की आवाजें आती हैं, लेकिन बीती रात से एंटी-मिसाइल सिस्टम सक्रिय होने से धमाकों की आवाज इतनी तेज होती है कि डर बढ़ जाता है।
फिलहाल तीन दिन से कहीं आना-जाना नहीं हो रहा है। स्कूल आनलाइन चल रहे हैं और कंपनी का काम भी घर से आनलाइन हो रहा है। उन्होंने बताया कि देहरादून के ही ईशान समेत कई परिवार उनके आसपास के इलाकों में फंसे हैं।
पंकज की फ्लाइट्स कैंसिल होने के कारण उनके भाऊवाला स्थित घर में इंतजार की घड़ियां काटनी मुश्किल हो रही हैं।
बुजुर्ग माता-पिता उनकी सलामती की प्रार्थना कर रहे हैं। पोता-पोती को गोद में खिलाने का इंतजार है। पिता मातबर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारत सरकार भारतीयों की सुरक्षा पर नजर बनाए है, फिर भी युद्ध तेज होने से डर बढ़ना स्वाभाविक है।

केस-2 : ईरान के कुम में फंसे नवविवाहित छात्र, सरकार से रेस्क्यू की गुहार
विकासनगर के अंबाड़ी क्षेत्र में रहने वाले शेखर अली का परिवार भी डर के साये में है। उनका छोटा भाई अली हैदर (23) पिछले चार सालों से ईरान के कुम शहर में रहकर पढ़ाई कर रहा है।
अली की शादी पिछले साल अक्टूबर में ही हुई है और उनकी पत्नी भी स्टडी वीजा पर उनके साथ गई है। अली ने अपने बड़े भाई शेखर अली को फोन पर बताया कि कुम शहर युद्ध की त्रासदी झेल रहे तेहरान से महज 100 किमी दूर है।
अब कुम में भी मिसाइलों की आवाजें साफ सुनाई देने लगी हैं। स्थिति यह है कि ईरान से फ्लाइट्स पूरी तरह बंद हो चुकी हैं, जिससे भारत लौटने का कोई रास्ता नहीं बचा है।
इधर, अंबाड़ी में उनके बड़े भाई और माता-पिता भारी तनाव में हैं। परिजनों का कहना है कि अभी तक भारत सरकार की ओर से रेस्क्यू (निकासी) की कोई सुगबुगाहट नहीं दिख रही है।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि युद्धग्रस्त क्षेत्र में फंसे छात्रों को सुरक्षित निकालने के लिए जल्द कदम उठाए जाएं।
अपनों की सलामती के लिए फोन ही एकमात्र सहारा
दुबई और ईरान में फंसे इन युवाओं का कहना है कि जैसे-जैसे ईरान की ओर से हमले तेज हो रहे हैं, वहां का माहौल बदल रहा है।
जंग के इस माहौल में अब वीडियो काल और फोन ही अपनों को जोड़ने का एकमात्र जरिया बचा है। देहरादून के इन परिवारों की नजरें अब टीवी की खबरों और सरकार की अगली एडवाइजरी पर टिकी हैं।
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