देहरादून। देश-दुनिया में प्लास्टिक कचरा आज एक बड़ी मुसीबत के रूप में उभरकर सामने आया है। इससे पर्यावरण पर पड़ रहे दुष्प्रभावों ने हर किसी को चिंता में डाला हुआ है। उत्तराखंड भी इससे अछूता नहीं है। 'दैनिक जागरण' के 'माय सिटी माय प्राइड' महाभियान के दौरान भी विशेषज्ञों ने प्लास्टिक के खतरों से आगाह करते हुए इसके लिए जनजागरण की जरूरत बताई थी। तब यह सहमति बनी कि प्रथम चरण में देहरादून के तीन स्कूलों को प्लास्टिक मुक्त किया जाएगा। इसी अवधारणा को लेकर 'गति फाउंडेशन' का 'चिल्ड्रन्स अगेंस्ट प्लास्टिक पॉल्यूशन' यानी सीएपीपी कार्यक्रम का मसौदा तैयार किया है। इस पहल में उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) ने सीएसआर के तहत सहयोग देने पर सहमति दी है।

चिल्ड्रंस अगेंस्ट प्लास्टिक पॉल्यूशन कार्यक्रम आखिर है क्या। बताते हैं गति फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष अनूप नौटियाल- 'यह कार्यक्रम शहर के तीन चयनित स्कूलों में संचालित किया जाएगा। एक साल के इस कार्यक्रम के लिए इन स्कूलों में प्लास्टिक कचरा एकत्र करने को डस्टबिन लगाए जाएंगे। विद्यार्थी अपने घरों का प्लास्टिक कचरा लाकर इसमें डालेंगे। फिर इस प्लास्टिक कचरे को शोध संस्थाओं को देने के अलावा रीसाइकिलिंग प्लांट में भेजा जाएगा।'

नौटियाल के मुताबिक इस कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के मध्य प्लास्टिक कचरा, इसके खतरे और इससे निबटने के उपायों को लेकर कार्यशालाएं, रैलियां, भाषण, पेंटिंग समेत अन्य स्पर्धाएं प्रस्तावित हैं। पहल के पीछे मंशा यही है कि बच्चों के साथ ही उनके अभिभावक भी प्लास्टिक कचरे को लेकर जागरूक हों। इस मुहिम के सफल रहने पर इसे अन्य स्कूलों के अलावा क्षेत्रों में भी विस्तार दिया जाएगा।

By Krishan Kumar