देहरादून, जेएनएन : 'खेल' में दुनिया को बदलने की ताकत है, वहीं इसमें प्रोत्साहन की क्षमता भी है । खेल शक्ति की तरह है जो लोगों को एकजुट रखती है। ऐसी ताकत किसी और चीज में कहां हैं? खेल युवा पीढ़ी से उनकी भाषा में बात करते हैं। खेल हताशा की जगह उम्मीद जगाती है। दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला की इन पंक्तियों को चरितार्थ करने की ठानी है देहरादून की 'धाद' संस्था ने। 

'दैनिक जागरण' के 'माय सिटी माय प्राइड' महाभियान के दौरान देहरादून शहर के सरकारी स्कूलों में खेल सुविधाएं जुटाने के आए विचार के बाद धाद संस्था ने पहले चरण में ऐसे 20 स्कूल चयनित करने का निर्णय लिया है। संस्‍थान ने इस सम्‍बंध में प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत चयनित स्कूलों में एक कक्षा में 'खेल कोना' तैयार किया जाएगा, जिसमें बच्चों की रूचि के अनुसार खेल सामग्री मुहैया कराई जाएगी।

खेलना बच्चों के जीवन का स्वाभाविक हिस्सा है और उसे एक स्वस्थ जीवन की बुनियाद देता है। इस कड़ी में सभी विद्यालयों के छात्रों को समुचित खेल सामग्री के साथ एक स्वस्थ और सर्वांगीण विकास की कल्पना के तहत हर कक्षा में एक 'खेल कोना' विकसित करना इस मुहिम का हिस्सा है। धाद संस्था के सचिव तन्मय ममगांई के अनुसार इस मुहिम के लिए प्रथम चरण में 10 माध्यमिक विद्यालय (इंटर कॉलेज व हाईस्कूल) और 10 बेसिक स्कूल (जूनियर हाईस्कूल व प्राथमिक विद्यालय) लिए जाएंगे।

इसके बाद इस मुहिम को धीरे-धीरे शहर के अन्य सरकारी स्कूलों तक ले जाया जाएगा। इस सिलसिले में धाद ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है। धाद के सचिव बताते हैं कि इसके तहत चयनित विद्यालयों में एक कक्षा में खेल कोना बनाया जाएगा। इसमें छात्रों की अभिरुचि के अनुसार बैडमिंटन, शतरंज, कैरम बोर्ड, फुटबॉल जैसी खेल सामग्री की व्यवस्था कराई जाएगी। खेल सामग्री की व्यवस्था होने पर संबंधित स्कूलों के मध्य खेल संस्थाओं के जरिये खेल प्रतियोगिताएं आयोजित कराने की भी मंशा है।

By Krishan Kumar