जागरण संवाददाता, देहरादून: भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद (एमसीआइ) की टीम ने सोमवार को दून मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने देहराखास स्थित मेडिकल कॉलेज व चिकित्सालय में व्यवस्थाएं जांचीं। बता दें, एमसीआइ ने गत वर्ष 19 सितंबर को कॉलेज का निरीक्षण किया था। फैकल्टी की कमी समेत कई अन्य खामिया इंगित की थी। कॉलेज प्रशासन का दावा है कि अधिकतर खामियां दुरुस्त कर ली गई हैं।

दून मेडिकल कॉलेज को वर्ष 2016 में 150 एमबीबीएस सीट की मान्यता मिली थी। वर्तमान में यहा एमबीबीएस के तीन बैच अध्ययनरत हैं। अगले साल यहा चौथे बैच के दाखिले होंगे। चतुर्थ वर्ष की मान्यता के लिए टीम ने मेडिकल कॉलेज व अस्पताल का निरीक्षण किया। प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने टीम को अस्पताल एवं कॉलेज का दौरा कराया। टीम ने सबसे पहले रेडियोलॉजी विभाग, इसके बाद मेडिसन, सर्जरी, गायनी, बाल रोग, नेत्र रोग विभाग समेत तमाम विभागों का दौरा किया। वहा पर बेड डिस्ट्रीब्यूशन समेत अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। पैथोलॉजी, इमरजेंसी एवं नई ओपीडी का भी टीम ने दौरा किया। प्राचार्य ने बताया कि टीम ने निरीक्षण पूरा कर लिया है और वह व्यवस्थाओं से संतुष्ट दिखी। तकरीबन एक माह में मान्यता पर फैसला आएगा। उन्होंने बताया कि फैकल्टी की कमी 32 से 20 प्रतिशत और एसआर-जेआर की कमी 20 से घटकर 16 पर आ गई है। आचार संहिता के चलते नई भर्तिया नहीं हो पा रही है। उम्मीद है कि 23 मई के बाद फैकल्टी की भर्ती शुरू की जाएगी। एमसीआइ के मानकों के अनुसार अस्पताल में नई सीटी स्कैन मशीन स्थापित की जानी है। जिसके लिए टेंडर की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। एमसीआइ की एक आपत्ति बेड विभाजन को लेकर थी। यह व्यवस्था भी समय रहते पूरी कर ली गई थी। बाकि कुछ छिटपुट खामियां थी, जिन्हें दूर कर लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि मान्यता मिलने में कोई अड़चन नहीं आएगी।

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