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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 13, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

नियंत्रित होगा पावर आफ अटॉर्नी अधिकार, पढ़िए पूरी खबर

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Published: Fri, 13 Sep 2019 10:52 PM (IST)Updated: Sat, 14 Sep 2019 10:52 AM (IST)

राज्य विधि आयोग की बैठक में बेनामी संपत्ति अधिनियम को लेकर चर्चा की गई। कहा गया कि इस अधिनियम में ...और पढ़ें

नियंत्रित होगा पावर आफ अटॉर्नी अधिकार, पढ़िए पूरी खबर
नियंत्रित होगा पावर आफ अटॉर्नी अधिकार, पढ़िए पूरी खबर

देहरादून, राज्य ब्यूरो। प्रदेश में भ्रष्टाचार पर शिंकजा कसने के क्रम में बेनामी संपत्ति अधिनियम को प्रभावी बनाने की दिशा में सरकार ने कदम आगे बढ़ा दिए हैं। इस सिलसिले में राज्य विधि आयोग से प्रस्ताव मांगा गया है। आयोग की शुक्रवार को हुई बैठक में अधिनियम को लेकर चर्चा की गई। कहा गया कि इस अधिनियम में पावर आफ अटॉर्नी अधिकार को नियंत्रित करने का प्रयास किया जाएगा।

बेनामी संपत्तियों पर शिकंजा कसने के मद्देनजर सरकार ने बेनामी संपत्ति के लिए कानून बनाने का एलान भले ही जुलाई में किया हो, मगर इसके लिए कसरत करीब सालभर पहले से शुरू कर दी गई थी। बीते वर्ष मुख्यमंत्री ने बेनामी संपत्ति रखने वाले लोगों के चिह्नीकरण के निर्देश विजिलेंस समेत अन्य एजेंसियों को दिए थे। इस बारे में जो सूचनाएं मिलीं, उसने सरकार के कान खड़े कर दिए। इसे देखते हुए सरकार ने बेनामी संपत्ति से संबंधित कानून में जरूरी प्रावधान शामिल करने पर जोर दिया। प्रस्तावित कानून में बिहार समेत देश के दूसरे राज्यों के कानूनों का अध्ययन करने को भी कहा गया।  

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति को आगे बढ़ाते हुए अब इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए गए हैं। सरकार की मंशा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे कार्मिकों के मामलों का निबटारा न होने तक उनकी संपत्ति बेचने पर रोक के साथ ही बेनामी संपत्ति जब्त करने के प्रावधान इसमें शामिल किए जाएं। इस कड़ी में सरकार ने राज्य विधि आयोग से प्रस्ताव मांगा है।

आयोग की शुक्रवार को हुई बैठक में बेनामी संपत्ति अधिनियम को लेकर गहनता से चर्चा हुई। बात सामने आई कि बेनामी संपत्ति मामले में पावर आफ अटॉर्नी का अहम रोल है। पूर्व में ये व्यवस्था थी कि सिर्फ ब्लड रिलेशन में ही पावर आफ अटॉर्नी दी जा सकेगी। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) राजेश टंडन की अध्यक्षता में हुई बैठक में कहा गया कि अधिनियम में पावर आफ अटॉर्नी को नियंत्रित करने के लिए प्रयास किया जाएगा। आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि इससे संबंधित समस्त रिपोर्ट मुख्यमंत्री को प्रस्तुत की जाएगी।

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आंशिक चकबंदी को मिलेगा कानूनी अधिकार

राज्य विधि आयोग की बैठक में बेनामी संपत्ति अधिनियम के अलावा कृषि नीति व राजस्व में समय एवं परिस्थिति के अनुसार कानून परिवर्तन पर चर्चा हुई। बैठक में मौजूद रहे कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि प्रदेश में स्वैच्छिक चकबंदी की अवधारणा होते हुए भी इसे कानूनी दर्जा प्राप्त नहीं है। चकबंदी अधिनियम में भी स्वैच्छिक व आंशिक चकबंदी को कानूनी दर्जा प्राप्त नहीं है। अब इसे कानूनी अधिकार प्रदान किया जाएगा। बताया गया कि इस संबंध में आयोग अपनी संस्तुति सरकार को देगी। आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि कृषि एवं चकबंदी से संबंधित अवस्थित कानून को संङ्क्षहताबद्ध और व्यवस्थित किया जाएगा।

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