विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 26, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

आखिर क्‍यों धंस रहा है उत्‍तराखंड का खूबसूरत हिल स्‍टेशन जोशीमठ? IIT व CBRI के वैज्ञानिकों ने बताई वजह

By Rena Edited By: Nirmala Bohra
Published: Mon, 26 Sep 2022 03:05 PM (IST)

Joshimath Sinking दरारों और धंसाव को लेकर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण सीबीआरआइ रुड़की आइआइटी रुड़की जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया और ...और पढ़ें

Joshimath Sinking : लगातार निगरानी व विस्तृत जांच पर जोर। जागरण
Joshimath Sinking : लगातार निगरानी व विस्तृत जांच पर जोर। जागरण

रीना डंडरियाल, रुड़की : Joshimath Sinking : जोशीमठ में घर व सड़कों पर आ रही दरारों और धंसाव को लेकर रुड़की स्थित केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान व भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के विज्ञानियों ने लगातार निगरानी व विस्तृत जांच पर जोर दिया है।

विज्ञानियों के अध्ययन में यह बात भी सामने आई कि जोशीमठ में जल निकासी का अभाव, भवनों का कंस्ट्रक्शन उचित तरीके से नहीं होना, नदी से भू-कटाव, तेजी से हो रहे निर्माण, प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से इस क्षेत्र का संवेदनशील होना भवनों में दरार आने और धंसाव की वजह हैं।

घरों की दीवारों पर दरारें

जोशीमठ में भूधंसाव होने के साथ ही घरों के अंदर दीवारों पर व बाहर दरारें आ रही हैं। बीते माह राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, सीबीआरआइ रुड़की, आइआइटी रुड़की, जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया और वाडिया इंस्टीट्यूट के विज्ञानियों ने संयुक्त रूप से जोशीमठ व आसपास के इलाकों में भूगर्भीय सर्वेक्षण किया।

ग्रामीणों की शिकायतों के बाद राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने टीम गठित कर जोशीमठ का दौरा किया। इसके बाद विज्ञानियों ने सरकार को रिपोर्ट बनाकर सौंप दी है। सीबीआरआइ रुड़की के विज्ञानी डा. शांतनु सरकार ने बताया कि बीते माह अध्ययन को जोशीमठ गई टीम ने 10-12 घरों का निरीक्षण किया, जिनकी दीवारों एवं घर के बाहर दरारें और धंसाव था।

बताया कि वहां पर पानी की निकासी नहीं है, जबकि निर्माण कार्य बढ़ रहा है। स्लोप में घर बनाए गए हैं और उनका कंस्ट्रक्शन डिजाइन ठीक नहीं है। साथ ही सोइल और मैटेरियल कमजोर हैं। इसलिए जोशीमठ में लगातार निगरानी और विस्तृत जांच की जरूरत है।

आइआइटी रुड़की के भूकंप अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर बीके माहेश्वरी के अनुसार जोशीमठ में जल निकासी का उचित प्रबंधन नहीं है। साथ ही कुछ घरों में फाउंडेशन भी ठीक तरीके से नहीं डाली गई है। फाउंडेशन से पहले काम्पैक्ट उचित तरीके से नहीं किया गया है। इसलिए वहां पर पानी की निकासी का उचित प्रबंधन करने के साथ ही सुनियोजित तरीके से निर्माण कार्य करने की आवश्यकता है। 

विज्ञानियों के सुझाव

  • जोशीमठ में ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर बनाया जाए
  • निचली ढलानों पर स्थित परिवार विस्थापित किए जाएं
  • निर्माण कार्यों पर लगे तत्काल रोक
  • यहां संसाधन विकसित करना और अन्य विकास कार्य हैं जोखिमपूर्ण

ग्रामीणों ने विज्ञानियों को दी जानकारी

  • अपने दौरे में विज्ञानियों ने जोशीमठ निवासियों को बताया कि उनके घरों की दीवार चटक रही हैं।
  • कई स्थानों पर जमीन भी धंस रही हैं।
  • सीबीआरआइ रुड़की के विज्ञानी डा. शांतनु सरकार के अनुसार ग्रामीणों ने बताया कि जोशीमठ में यह बदलाव पिछले साल अक्टूबर में हुई भारी बारिश के बाद से दिख रहा है।
  • जोशीमठ-औली रोड भी कई स्थानों पर भी धंस रही है।
  • कुछ घरों की छत पर भी दरार आई हैं।

मिश्रा कमेटी की रिपोर्ट में भी इसका उल्लेख

जोशीमठ शहर में लंबे समय से भू-धंसाव हो रहा है। वर्ष 1975 में मिश्रा कमेटी की रिपोर्ट में भी इसका उल्लेख हुआ है। भूकंप की दृष्टि से भी यह संवेदनशील क्षेत्र है। जोशीमठ-औली रोड पर भूमि धंस रही है। ऐसे में इसके ऊपर टिके बड़े-बड़े बोल्डर कभी भी गिर सकते हैं। इससे जोशीमठ के निचले हिस्से में खतरे की आशंका है।