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हरक सिंह रावत को बेटा स्वीकार करना होगा, नहीं तो यहीं दे दूंगी जान, जेनी ने किया आर-पार की लड़ाई का ऐलान

Published: Sat, 07 Nov 2026 07:39 PM (IST)

जेनी ने पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत पर दुष्कर्म और शोषण का आरोप लगाते हुए अपने बेटे को पहचान दिलाने ...और पढ़ें

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HighLights

  1. जेनी ने हरक सिंह रावत पर दुष्कर्म, शोषण का आरोप लगाया।

  2. बेटे को पिता का नाम, पहचान दिलाने की मांग की।

  3. मुख्यमंत्री धामी से मिलकर अपना पक्ष रखने की इच्छा जताई।

अश्वनी त्रिपाठी, जागरण, देहरादून। पूर्व मंत्री डा. हरक सिंह रावत पर दुष्कर्म और शोषण के आरोप लगाने वाली जेनी ने अब अपने बेटे को पिता का नाम और पहचान दिलाने के लिए आर-पार की लड़ाई का एलान किया है। उन्होंने कहा कि हरक सिंह रावत को बेटे को स्वीकार करना ही होगा, नहीं तो वह यहीं अपनी जान दे देंगी।

जेनी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी इस लड़ाई में साथ देने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री से मिलकर अपना पक्ष रखना चाहती हैं। जेनी ने 23 साल पुराने प्रकरण की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए दावा किया कि सीबीआइ ने कभी उनसे यह जानने की कोशिश नहीं की कि उनके साथ क्या हुआ था। उनका कहना है कि अब वह अपने बेटे के सवालों और उसकी पहचान के लिए सामने आई हैं।

नारी निकेतन से निकलने के लिए मजबूरी में किए हस्ताक्षर

जेनी ने बताया कि वह नारी निकेतन में नहीं रहना चाहती थीं। इसी मजबूरी में उन्होंने कागजों पर हस्ताक्षर किए थे। उनके मुताबिक, वकील ने सलाह दी थी कि हस्ताक्षर कर दो और नारी निकेतन से बाहर निकल जाओ, नहीं तो पूरी जिंदगी पागलों के बीच गुजारनी पड़ेगी। जेनी का दावा है कि उन्होंने अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि वहां से निकलने की मजबूरी में हस्ताक्षर किए थे।

मुख्यमंत्री ने नाम लिया तो लगा, अपनी बात रखनी चाहिए

जेनी ने 23 साल बाद सामने आने की वजह बताते हुए कहा कि जब मुख्यमंत्री धामी ने अंकिता भंडारी प्रकरण के साथ उनका नाम लिया तो उन्हें लगा कि लोग आज भी उनके मामले को जानते हैं। उन्हें लगा कि अपनी बात सामने रखनी चाहिए।

इसी के बाद उन्होंने देहरादून आकर अपने साथ हुए कथित अन्याय की आवाज उठाने का फैसला किया। उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपना पक्ष रखने की इच्छा जताई।

मेरा बेटा पूछता है, उसका पिता कौन है?

जेनी के मुताबिक, उनका बेटा अब 23 साल का हो चुका है और लगातार अपने पिता के बारे में सवाल करता है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि बेटे को क्या जवाब दें, जब उसकी पहचान का सवाल 23 साल से अनसुलझा है। जेनी ने दावा किया कि हरक सिंह रावत के परिवार के लोगों को भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी है। उन्होंने कहा कि अब वह अपने बेटे को उसका अधिकार और पहचान दिलाकर रहेंगी।

सैंपल ही नहीं लिया तो डीएनए टेस्ट कैसे हो गया?

जेनी ने पूर्व में हुई डीएनए जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब उनका सैंपल ही नहीं लिया गया तो डीएनए टेस्ट कैसे हो गया? उन्होंने दावा किया कि उस समय उन्होंने अपना बयान वापस नहीं लिया था, लेकिन सभी लोग हरक सिंह के पक्ष में बोल रहे थे। उनकी बात नहीं सुनी गई। नारी निकेतन से निकलने के लिए ही दस्तखत कर हरक को क्लीन चिट दी थी।

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