उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले जेनी ने फिर खोली जुबान, हरक सिंह रावत पर नए आरोप
उत्तराखंड की सियासत में 23 साल पहले खलबली मचाने वाला जेनी प्रकरण फिर सुर्खियों में है। जेनी ने हरक सिंह ...और पढ़ें

राज्य ब्यूरो, जागरण देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में 23 साल पहले खलबली मचाने वाला जेनी प्रकरण अब एक बार फिर से सुर्खियों में है। दो दशक से ज्यादा समय तक शांत रहे इस मामले में नए आरोपों और पुराने जांच रिकार्ड पर सवालों ने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है।
जेनी ने देहरादून पहुंचकर शनिवार को जुबान खोली तो इस बार मामला केवल बेटे के पितृत्व और डीएनए जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि यौन शोषण, मानसिक प्रताड़ना और तत्कालीन जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता भी प्रश्नचिह्न खड़े करता है।
यह है जेनी प्रकरण
राज्य गठन के बाद वर्ष 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में जनता ने कांग्रेस को बहुमत दिया और मुख्यमंत्री बने पंडित नारायण दत्त तिवारी। तिवारी सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2003 में ऐसा प्रकरण सामने आया, जिसने सियासी गलियारों में तूफान ला दिया था।
इसके केंद्र में थी असम की युवती इंदिरा देवड़ी उर्फ जेनी। बताते हैं कि वह अक्टूबर 2002 में काम की तलाश में देहरादून आई थी। जेनी ने जून, 2003 में देहरादून के सरकारी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया। तब जेनी ने तत्कालीन राजस्व मंत्री हरक सिंह रावत को अपने बच्चे का पिता बताया। इसके बाद तो सियासत गर्मा गई।
विधानसभा में गूंजा मुद्दा, हरक ने दिया था इस्तीफा
18 जून, 2003 को यह मुद्दा विधानसभा में गूंजा और विपक्ष ने प्रकरण पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। विवाद बढ़ा तो तत्कालीन राजस्व मंत्री हरक सिंह रावत ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और ऐलान किया कि जब तक वह बेदाग साबित नहीं हो जाते, विधानसभा का रुख नहीं करेंगे।
इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने प्रकरण की सीबीआइ जांच की संस्तुति की। सीबीआई ने 12 जुलाई को प्रारंभिक जांच शुरू की और 23 जुलाई को सीबीआइ ने जेनी के बयान के आधार पर हरक सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत मुकदमा दर्ज किया। जेनी का आरोप था कि नौकरी का आश्वासन देकर उनके साथ दुष्कर्म किया गया।
हरक को क्लीन चिट मिल गईम
इसके बाद सीबीआइ ने जांच के दौरान बच्चे और हरक सिंह के डीएनए के नमूने लिए। इसमें नमूनों का मिलान नहीं होने की बात सामने आई और फिर हरक सिंह रावत को मामले में क्लीन चिट मिल गई।
हालांकि, जुलाई, 2016 में दिल्ली में हरक के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की बात सामने आई। लेकिन मामला फिर रफा-दफा हो गया। अब जेनी 23 साल बार फिर से सार्वजनिक रूप से सामने आई और हरक सिंह पर दुष्कर्म, यौन शोषण और मानसिक प्रताड़ना के नए आरोप लगाते हुए दोबारा सीबीआइ जांच की मांग की है।
साथ ही डीएनए और नार्को टेस्ट की मांग की है, ताकि उसके बच्चे को पिता का नाम मिल सके। इस प्रकरण में आगे क्या होगा, इस पर तो जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी, लेकिन जेनी के जुबान खोलने से सियासी पारा गर्मा गया है।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।