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जेनी प्रकरण: हरक सिंह रावत मामले में पुराना केस खोलने में हैं कई कानूनी चुनौतियां, विशेषज्ञों ने दी जानकारी

Published: Sat, 07 Nov 2026 08:08 PM (IST)

जेनी प्रकरण ने 23 साल बाद फिर से राजनीतिक भूचाल ला दिया है, जिसमें पुराने मामले को दोबारा खोलने में कई कानूनी अड़चनें सामने आ रही हैं।

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HighLights

  1. पुराना जेनी प्रकरण फिर से खोलने में कानूनी बाधाएं।

  2. सीबीआई अदालत की अनुमति के बिना केस नहीं खुलेगा।

  3. पितृत्व परीक्षण के लिए भी अदालत की मंजूरी जरूरी।

विकास गुसाईं, जागरण, देहरादून। जेनी प्रकरण ने प्रदेश की राजनीति में 23 साल बाद एक बार फिर बड़ा भूचाल ला दिया है। जेनी ने हरक पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुराने मामले को फिर से खोलने का अनुरोध किया है, लेकिन विधि विशेषज्ञों की मानें तो यह सब आसान नहीं होगा।

मुकदमा वहीं खुल सकेगा, जहां से इसे बंद किया गया था। यानी, सीबीआइ अदालत की अनुमति के बाद ही इस मामले की फाइल फिर से खुल सकेगी। वह भी उस स्थिति में जब यह साबित हो कि मामले में ऐसे ठोस तथ्य पाए गए हैं जो पिछली जांचों में प्रकाश में नहीं आ पाए थे।

पुलिस ने जेनी के पुलिस महानिदेशक को दिए गए पत्र के आधार पर जांच सीओ डालनवाला को सौंपी है। अब जांच की प्रक्रिया क्या होगी, इस पर सबकी नजर टिकी हुई है। वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्रशेखर तिवारी कहते हैं कि केस को नए सिरे से खोलने में कई कानूनी बाधाएं सामने आएंगी।

इस मामले में नए सिरे से मुकदमा दर्ज नहीं होगा, बल्कि पुराने मामले को फिर से खोला जाएगा। इस मामले में सीबीआइ पहले ही क्लोजर रिपोर्ट लगा चुकी है। ऐसे में पुलिस केवल इस मामले में प्रारंभिक जांच कर सकती है।

इसमें पुलिस को यदि ठोस तथ्य मिलते हैं तो ही मामले को फिर से सीबीआइ के जरिये सीबीआइ अदालत के समक्ष ले जाया जाएगा, जो यह निर्णय लेगी कि नए तथ्यों के आधार पर फिर से मामले को खोला जा सकता है या नहीं। यह मामला खुलता भी है तो पुरानी रिपोर्ट के आधार पर ही जांच आगे बढ़ेगी। यद्यपि, पुलिस इसमें नई चार्जशीट जोड़ सकता है।

अब डीएनए नहीं होगा पेटरनिटी टेस्ट

वह बताते हैं कि अब मामला पितृत्व का है तो इसमें भ्रूण यानी डीएनए नहीं बल्कि पेटरनिटी टेस्ट यानी पितृत्व परीक्षण होगा। इसके लिए भी अदालत की अनुमति जरूरी होगी। उन्होंने यह भी बताया चूंकि डीएनए टेस्ट पूर्व में हो चुका है ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के एक नए निर्णय के अनुसार पेटरनिटी टेस्ट के लिए हरक सिंह रावत की अनुमति भी जरूरी होगी।

डीएनए जांच पर सवाल

जेनी ने मामले में पूर्व में किए गए डीएनए की जांच में भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनका कोई टेस्ट नहीं लिया गया। उन्हें यह समझ नहीं आया कि आखिर इसकी अंतिम रिपोर्ट कैसे तैयार हुई। केवल एक बार सीबीआइ उनसे नारी निकेतन में पूछताछ के लिए आई थी।

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