देहरादून,  जेएनएन। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में एक करोड़ के घोटाले में विजिलेंस ने वित्त अधिकारी और डिप्टी रजिस्ट्रार से पूछताछ की। दोनों अधिकारियों से विजिलेंस टीम ने मिश्रा प्रकरण से जुड़े दस्तावेज भी मांगे हैं। इधर, मिश्रा की प्रॉपर्टी और बैंक खातों की जांच को दिल्ली गई टीम रिपोर्ट लेकर दून लौट आई है। 

आयुर्वेद विवि के निलंबित कुलसचिव मृत्युंजय मिश्रा को विजिलेंस ने तीन दिसंबर को गिरफ्तार किया था। मिश्रा इन दिनों सुद्धोवाला जेल में बंद है।

इस प्रकरण में मिश्रा की पत्नी श्वेता मिश्रा, विवि को कंप्यूटर उपकरण की आपूर्ति करने वाली फर्म अमेजन ऑटोमेशन की शिल्पा त्यागी, क्रिएटिव वल्र्ड सोलेशन की नूतन रावत और मिश्रा के ड्राइवर अवतार सिंह के खिलाफ अभी जांच चल रही है। इसके अलावा विजिलेंस आरोपितों से समय-समय पर पूछताछ कर रही है। इधर, विजिलेंस के एसएसपी सेंथिल अबूदई कृष्णराज ने बताया कि घोटाले को लेकर विवि के डिप्टी रजिस्ट्रार और वित्त अधिकारी से पूछताछ की गई।

दोनों ने प्रकरण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी हैं। इस मामले में दोनों से कुछ दस्तावेज भी मांगे गए हैं। दोनों अधिकारियों से दोबारा पूछताछ की जाएगी। एसएसपी ने कहा कि मिश्रा की दिल्ली के बाराखंभा रोड स्थित प्रॉपर्टी की पुष्टि वहां गई टीम ने कर दी है। टीम ने दिल्ली से लौटने के बाद इसकी रिपोर्ट दे दी है। मिश्रा के नाम दिल्ली में चल रहे बैंक खातों की भी डिटेल मिल गई है। इन खातों की जांच की जा रही है। अभी तक मिश्रा और परिजनों के नाम 12 बैंक खाते मिल चुके हैं। 

आइटीडए से मिला एक्सपर्ट 

आयुर्वेद विश्वविद्यालय में कंप्यूटर उपकरण समेत अन्य खरीदारी की तकनीकी जांच के लिए विजिलेंस को आइटीडीए से एक्सपर्ट मिल गया है। एक्सपर्ट उपकरणों के लिए दिए गए आर्डर, भुगतान, फर्म एवं दूसरी तकनीकी जांच करेंगे। इसके अलावा वित्त विभाग और आयकर विभाग के एक्सपर्ट भी पूरे प्रकरण की जांच में विजिलेंस को सहयोग दे रहे हैं।  

कृष्ण कुमार वीके (डीआइजी विजिलेंस) का कहना है कि आयुर्वेद विश्वविद्यालय के घोटाले की जांच जारी है। मृत्युंजय मिश्रा और अन्य आरोपितों के खिलाफ मिले सबूतों का अध्ययन किया जा रहा है। बैंक खातों के अलावा विवि की पत्रावलियों की जांच भी की जा रही है। जल्द इस मामले में बड़ी कार्रवाई हो सकती है। 

एम्स दिल्ली के नाम से बनाए फर्जी चेक

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली के नाम से जारी 45 लाख रुपये के चेक भुगतान के लिए एसबीआई कांवली रोड शाखा में जमा हुए तो बैंक अधिकारियों को शक हुआ। वह यह कि इतनी बड़ी धनराशि किसी आम बैंक खाते में जमा कराने का क्या औचित्य है। छानबीन में पता चला कि एम्स दिल्ली ने तो चेक जारी ही नहीं किया है।

कोतवाली पुलिस को एसबीआइ कांवली रोड की शाखा प्रबंधक नेहा बिष्ट की ओर से तहरीर दी गई। जिसमें बताया गया कि शिव नाम लेखन बैंक सेवा संस्थान ट्रस्ट मोहन कुटी, पार्क रोड, लक्ष्मण चौक का कांवली रोड एसबीआई शाखा में अकाउंट है। 

इसके नाम से 45 लाख रुपये का एक चेक बीती आठ जनवरी को बैंक में जमा किया गया। चेक एम्स दिल्ली के डायरेक्टर की ओर से जारी किया गया था। चेक के क्लियरेंस से पूर्व जांच पड़ताल की गई तो एम्स के चेक का अकाउंट दिल्ली में पाया गया। अकाउंट होल्डर के द्वारा बताया गया कि चेक उनकी ओर से जारी ही नहीं किया गया था। कोतवाल शिशुपाल नेगी ने बताया कि मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। सीसीटीवी फुटेज से उस व्यक्ति के बारे में पता लगाया जा रहा है, जिसने यह चेक बैंक में जमा किए हैं। प्रारंभिक जांच में ही यह साफ हो गया है कि चेक फर्जी है, लेकिन जमा करने वाले की गिरफ्तारी के बाद ही पूरी साजिश का पता चलेगा।

विजिलेंस तलाश रही मिश्रा और मृणाल के बीच कनेक्शन

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले मृणाल धूलिया और मृत्युंजय मिश्रा के बीच कनेक्शन का पता लगाने में विजिलेंस की टीम जुट गई है। विजिलेंस मृणाल धूलिया के जमीन के दस्तावेजों और बैंक खातों से हुए लेनदेन की डिटेल लेकर जांच कर रही है। यदि दोनों के बीच किसी तरह का कनेक्शन सामने आता है तो मृणाल पर विजिलेंस भी शिकंजा कसने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। 

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में नौकरी दिलाने के नाम एक दर्जन से अधिक लोगों के डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी करने का आरोपित मृणाल धूलिया विवि के निलंबित कुलसचिव मृत्युंजय मिश्रा का बेहद करीबी था। ठगी का आरोप लगाने वालों का कहना है कि वह वसूली मिश्रा की ही शह पर काम करता था। बता दें कि मृणाल धूलिया पुत्र दिनेश चंद्र धूलिया निवासी जीटीएम मोहकमपुर व उसके भाई नीरज धूलिया ने नेहरू कॉलोनी में ओजस्वी एसोसिएट्स के नाम से आफिस खोल रखा था। 

दोनों उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय में पंचकर्म अस्पताल का पीपीपी मोड पर संचालन भी करते थे। इसके चलते उनकी नजदीकी तत्कालीन कुलसचिव मृत्युंजय मिश्रा से बढ़ी तो धीरे-धीरे खुद को वह खुद को ही विश्वविद्यालय का ही संचालक बताने लगे। सिक्का चलना शुरू हुआ तो उसी समय विश्वविद्यालय में 135 पदों पर भर्ती निकली। 

धूलिया बंधुओं ने ऐसा प्रचारित किया जैसे यह सारी भर्तियां उन्हीं को करनी हैं। विश्वविद्यालय के अंदरखाने में इसे लेकर हलचल तो थी, लेकिन मिश्रा से नजदीकी और उसके रुतबे को देख कोई भी बोलने का साहस नहीं कर सका। ऐसे में मामले में विजिलेंस ने भी जांच शुरू कर दी है। विजिलेंस के अधिकारी नेहरू कॉलोनी पुलिस से संपर्क में हैं। विजिलेंस ने मृणाल धूलिया के प्रापर्टी के दस्तावेजों के साथ उसके बैंक अकाउंट में हुए लेनदेन की भी पड़ताल शुरू कर दी है।

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Posted By: Sunil Negi

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