जागरण संवाददता, देहरादून। Indian Military Academy Passing Out Parade भारत माता तेरी कसम तेरे रक्षक बनेंगे हम, आइएमए गीत पर कदमताल करते जेंटलमैन कैडेट ड्रिल स्क्वायर पर पहुंचे तो लगा कि विशाल सागर उमड़ आया है। एक साथ उठते कदम और गर्व से तने सीने दर्शक दीर्घा में बैठे हरेक शख्स के भीतर ऊर्जा का संचार कर रहे थे। शनिवार को भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) में अंतिम पग भरते ही 341 नौजवान भारतीय सेना का हिस्सा बन गए। इसके साथ ही 84 विदेशी कैडेट भी पास आउट हुए। पश्चिमी कमान के जीओसी-इन-सी ले. जनरल आरपी सिंह ने परेड की सलामी ली।

मुख्य अतिथि ले. जनरल सिंह ने कहा कि आज के दौर में युद्ध का चरित्र और प्रकृति बदल गई है। कई नई चुनौतियां सामने हैं और एक योद्धा के रूप में अधिक जागरूक और दक्ष होना होगा। उन्होंने उत्कृष्ट परेड के लिए प्रशिक्षकों और जेंटलमैन कैडेटों की सराहना की। कहा कि परेड में अकादमी के उच्च मानकों व अनुशासन व का प्रतिबिंब साफ दिखता है। उन्होंने कहा कि यह विदेशी कैडेटों के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो हमेशा के लिए उनकी स्मृति में अंकित रहेगा। विदेशी कैडेटों ने यहां रहकर जो रिश्ते बनाए हैं, वह आगे भी दो देशों को एक साथ बांधें रखेंगे।

जे. जनरल ने श्रेष्ठ में सर्वश्रेष्ठ कैडेटों को सम्मानित किया। सीकर राजस्थान के मुकेश कुमार को स्वार्ड आफ आनर व रजत पदक प्रदान किया गया। जबकि उत्तराखंड के अल्मोड़ा जनपद से दीपक सिंह को स्वर्ण व मोगा पंजाब के लवनीत सिंह को कांस्य पदक मिला। अल्मोड़ा के दक्ष कुमार पंत ने सिल्वर मेडल (टीजी) हासिल किया। भूटान के किन्ले नोरबू सर्वश्रेष्ठ विदेशी कैडेट चुने गए। चीफ आफ आर्मी स्टाफ बैनर डोगराई कंपनी को मिला।

इससे पहले सुबह खराब मौसम के कारण परेड दो घंटा विलम्ब से शुरू हुई। सुबह 7 बजकर 57 मिनट पर मार्कर्स कॉल के साथ परेड का आगाज हुआ। कंपनी सार्जेंट मेजर जयदीप सिंह, शिवजीत सिंह संधु, पीडी शेरपा, राहुल थापा, सक्षम गोस्वामी व जीतेंद्र सिंह शेखावत ने ड्रिल स्क्वायर पर अपनी-अपनी जगह ली। 8 बजे एडवांस कॉल के साथ ही छाती ताने देश के भावी कर्णधार असीम हिम्मत और हौसले के साथ कदम बढ़ाते परेड के लिए पहुंचे। इसके बाद परेड कमांडर दीपक सिंह ने ड्रिल स्क्वायर पर जगह ली। कैडेटों के शानदार मार्चपास्ट से दर्शक दीर्घा में बैठा हर एक शख्स मंत्रमुग्ध हो गया। आइएमए कमांडेंट ले जनरल हरिंदर सिंह, डिप्टी कमांडेंट मेजर जनरल जगजीत सिंह मंगत समेत कई सैन्य अधिकारी मौजूद थे।

कोरोना का दिखा असर

कोरोना संकट के चलते पासिंग आउट परेड में तमाम स्तर पर एहतियात बरती गई। न केवल दर्शक दीर्घा बल्कि परेड के दौरान भी शारीरिक दूरी के नियमों का पूरा पालन किया गया। हरेक माॄचग दस्ते में अमूमन दस कैडेट एक लाइन में होते हैं। पर इनकी संख्या आठ रखी गई। ताकि कैडेटों के बीच रहने वाली 0.5 मीटर की दूरी के बजाए दो मीटर की दूरी बनी रहे। कैडेटों के स्वजन को आने की अनुमति भी नहीं दी गई थी। इसके अलावा जेंटलमैन कैडेटों के साथ ही सभी सैन्य अधिकारी भी मास्क पहने रहे।

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Edited By: Sunil Negi