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    IMA POP 2023: पहाड़ का भारतीय सेना से अटूट नाता... पढ़ें वीर प्रसूता देवभूमि उत्तराखंड के बेटों की शौर्य गाथा

    By Jagran NewsEdited By: Nirmala Bohra
    Updated: Sun, 11 Jun 2023 08:40 AM (IST)

    IMA POP 2023 वीर गबर सिंह दरबान सिंह और चंद्र सिंह गढ़वाली की शौर्य गाथाओं को सुनकर बड़े हुए पहाड़ के युवाओं में फौजी बनने की चाहत रची-बसी है। आइएमए पासिंग आउट परेड में भी एक बार फिर यही तस्वीर नुमाया हुई।

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    IMA POP 2023: देवभूमि उत्तराखंड की धरती वीर प्रसूता है।

    जागरण संवाददाता, देहरादून: IMA POP 2023: देवभूमि उत्तराखंड की धरती वीर प्रसूता है। इस पावन माटी में जन्म लेते हैं जांबाज सिपाही। वीर गबर सिंह, दरबान सिंह और चंद्र सिंह गढ़वाली की शौर्य गाथाओं को सुनकर बड़े हुए पहाड़ के युवाओं में फौजी बनने की चाहत रची-बसी है। यहां के युवाओं के लिए सेना सिर्फ रोजगार का अवसर नहीं, बल्कि एक परंपरा भी है। आइएमए पासिंग आउट परेड में भी एक बार फिर यही तस्वीर नुमाया हुई।

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    दृढ़ संकल्प ने पिता की ‘ना’ को ‘हां’ में बदला

    पिता को नहीं लगता था कि मैं सेना में भर्ती हो पाऊंगा। वह हमेशा कहते थे कि यह तेरे बस का नहीं है। एक बार उन्होंने मुझे भर्ती रैली से वापस घर भेज दिया था। इसी बात को लेकर मैंने सेना में जाने का दृढ़ संकल्प लिया और कड़ी मेहनत से सफलता प्राप्त की। यह कहना है मूलरूप से रुद्रप्रयाग के जखोली ब्लाक स्थित ग्राम बुडना निवासी विकास रावत का। उनका परिवार वर्तमान में देहरादून के बंजारावाला में रहता है।

    पिता गोविंद रावत सेना से आनरेरी कैप्टन सेवानिवृत्त हैं, जबकि मां भागीरथी रावत गोरखा मिलिट्री इंटर कालेज गढ़ीकैंट में शिक्षक हैं। दसवीं की पढ़ाई आर्मी स्कूल क्लेमेनटाउन और 12वीं की स्कालर होम से की। बकौल विकास, ‘पिता चाहते थे कि मैं इंजीनियर बनूं।

    वह हमेशा यही कहते कि इस सबमें कुछ नहीं रखा है, बीटेक कर ले। वर्ष 2015 में जब मैं लैंसडौन में सेना भर्ती रैली में गया तो तब वहां तैनात पिता ने 500 रुपये देकर वापस लौटने को कहा था। हालांकि, आज स्थिति अलग है। पिता मुझ पर गर्व महसूस करते हैं।’ विकास की पत्नी अनुष्का रावत एक फर्म में लीगल एडवाइजर हैं।

    पिता के सेवानिवृत्त हेने से पूर्व बेटे ने दिया उपहार

    कारगी चौक के विद्या विहार फेज-2 निवासी सूबेदार रणवीर सिंह के बेटे नितेश रावत ने परिवार की सैन्य परंपरा को कायम रखा है। वहीं, सेवानिवृत्त से पहले बेटे को अफसर देख पिता ने इसे खुद के लिए बड़ा उपहार बताया। मूल रूप से पौड़ी जिले के चौबट्टाखाल के खेड़ागांव निवासी नितेश के पिता सूबेदार रणवीर सिंह 66 इंजीनियर रेजीमेंट में रुड़की में तैनात हैं।

    जबकि नितेश के दादा साधू सिंह रावत आनरेरी कैप्टन रहे। नितेश के पिता सूबेदार रणवीर सिंह ने बताया कि 30 जून को उनका रिटायरमेंट हैं, बेटे को सैन्य अफसर के रूप में देख मेरे लिए उपहार जैसा है। बेटे का शुरू से ही सपना था कि वह भी इस परंपरा को आगे बढ़ाएगा जो उसने कर दिखाया है।

    इससे अधिक खुशी की बात एक पिता व उसके परिवार के लिए और क्या हो सकती है। नितेश की पढ़ाई एसजीआरआर पटेलनगर से हुई। इसके बाद डीएवी पीजी कालेज से बीएससी किया। इस दौरान सीडीएस की परीक्षा पास कर आइएमए तक पहुंचे। पासिंग आउट परेड के बाद पीपिंग सेरेमनी में नितेश की मां नीमा रावत, बहन निशा रावत भी पहुंचे।

    दोनों बेटे ने किया पिता का सीना चौड़ा

    गढ़ी कैंट के बिलासपुर कांडली निवासी हवलदार दीपक राय के लिए शनिवार का दिन खास रहा। बड़ा बेटा करन राय 5/11 जीआर मे तैनात है, जबकि छोटे बेटे कौशल ने भी आइएमए से पासिंग आउट परेड पूरी कर पिता के कंधे को मजबूत किया है।

    दीपक ने बताया कि बचपन में जब कभी दोनों बेटे को डांट पड़ती तो कहते थे कि एक दिन हम आपके कंधे मजबूत करेंगे। मैं पत्नी लक्ष्मी राय से बार बार इस बात का जिक्र करता रहता था। आज वह याद दोहरा कर गौरवांवित महसूस कर रहा हूं।

    देश के लिए सेवा करना ही सबसे पहला कदम हैं खासतौर पर जब बात सैन्य परिवार की हो तो उसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है। दोनों बेटे की पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय बीरपुर से हुई। कौशल वर्ष 2017 में भर्ती हुए। अपने मेहतन के बूते एसीसी की परीक्षा पास की व आज यहां तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि लक्ष्य कोई भी कठिन नहीं बस उसे करने के लिए लगन मेहतन व हिम्मत ना हारने वाला होना जरूरी होना चाहिए।

    चौथी पीढ़ी ने सैन्य अधिकारी की परंपरा को रखा कायम

    देहरादून के डिफेंस कालोनी निवासी समर्थ थपलियाल ने आइएमए से पासिंग आउट परेड के बाद परिवार से सैन्य अफसर के रूप में चौथी पीढ़ी को कायम रखा है। समर्थ के पिता कर्नल संजय थपलियाल दिल्ली में सेवारत हैं। दादा बृजभूषण थपलियाल लेफ्टिनेंट कर्नल थे। जबकि परदादा केदारदत्त थपलियाल बर्मा सेना में थे।

    मूल रूप से परिवार पौड़ी के थापली गांव निवासी समर्थ के परिवार के लिए शनिवार का दिन गौरवांवित करने वाला था। समर्थ के पिता कर्नल संजय थपलियाल ने बताया कि उनके दो बेटे में बड़ा शुभांकर थपलियाल दिल्ली में कंप्यूटर इंजीनियर है। जबकि छोटा बेटा समर्थ आज अधिकारी बन गया है।

    उनका शुरू से ही सपना था कि इस सैन्य परंपरा को कायम रखना है जो बेटे ने आज पूरा कर दिखाया। समर्थ की पढ़ाई आमी पब्लिक स्कूल लखनऊ से हुई। इसके बाद कालेज पुणे से किया। सीडीएस निकालने के बाद उनका यहां चयन हुआ। समर्थ के नाना भी सेना से सेवानिवृत्त हैं। जबकि मामा भी फौज में अफसर हैं।

    पिता पुत्र को वर्दी में देख परिवार के छलके आंसू

    लेफ्टिनेंट दक्ष ममगाईं व उनके पिता कर्नल हरिप्रसाद ममगाईं को वर्दी में एक साथ देख परिवार के आंखों से खुशी के आंसू छलक उठे। मूल रूप से ग्राम कुहेड़ चमोली निवासी कर्नल हरि गढ़ी कैंट में रहते हैं। पत्नी मधु व परिवार के अन्य स्वजन के साथ वह भी बेटे की परेड देखने पहुंचे थे।

    दोनों को एक साथ देख पत्नी मधु ने कहा कि यह उनके लिए दोगुनी खुशी वाला दिन है, जब वह दोनों को वर्दी में एक साथ देख रही हैं। कर्नल हरि प्रसाद ने बताया कि दक्ष ने दिल्ली से पढ़ाई पूरी की। इसके बाद पुणे से बीबीए किया फिर सीडीएस के माध्यम से यहां पहुंचे। बताया कि एक पिता होने के नाते वह इस दिन खुद को गौरवांवित महसूस कर रहे हैं।

    बागेश्वर के पंकज पांडे ने पिता का सपना किया पूरा

    बागेश्वर के पंकज पांडे ने पिता सेवानिवृत्त हवलदार लक्ष्मी दत्त पांडे के बचपन का वादा पूरा किया। पिता ने पंकज को सेना में अफसर बनाने का वादा किया था। शनिवार को आइएमए से पासिंग आउट परेड के बाद उनका यह सपना पूरा हो गया।

    लक्ष्मी ने बताया कि वह चाहते थे कि उनका बेटा सेना में अच्छे पर जाकर नाम कमाए। दो के बेटे में बड़ा बेटा शिक्षक है इसलिए पूरी नजर छोटे बेटे यानी पंकज पर थी। उसने जहां मेरा वादा पूरा किय वहीं परिवार का मान भी बढ़ाया। आर्मी पब्लिक स्कूल बरेली से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद जेएनयू से ग्रेजुएशन किया। सीडीएस से यहां पहुंचे।

    न्यू सेरा कालोनी पिथौरागढ़ निवासी हेमराज बिष्ट भी सेना में लेफ्टिनेंट बन गए हैं। जिससे उनके स्वजन खासे उत्साहित हैं। उनके पिता प्रकाश सिंह बीएसएफ में हैं और अभी एलओसी पर तैनात हैं। हेमराज की पढ़ाई न्यू बीरशेबा पब्लिक स्कूल से हुई है। इसके बाद एनडीए की परीक्षा पास की। उनकी बहन मोनिका बिष्ट आइटी सेक्टर में एचआर व भाई कपिल मर्चेंट नेवी में हैं।

    शौर्य ने बढ़ाया मान

    जौलीग्रांट निवासी शौर्य मखलोगा भी फौज में अफसर बन गए हैं। उनके पिता चंद्रवीर सिंह विधानसभा में कार्यरत हैं। दादा सूरज सिंह सेना से हवलदार रिटायर हैं। मां रीना गृहणी हैं। शौर्य ने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा दून पब्लिक स्कूल भानियावाला से हुई। इसके बाद एनडीए प्रवेश परीक्षा पास की। उनकी छोटी बहन आस्था एमएससी कर रही हैं।