उत्तराखंड में होमगार्ड के बराबर होगा पीआरडी स्वयंसेवकों का मानदेय, अभी प्रतिदिन मिलता है इतना
उत्तराखंड सरकार अब जल्द ही प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) स्वयंसेवकों का मानदेय होमगार्ड के बराबर करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए युवा कल्याण विभाग की ओर से प्रस्ताव तैयार कर वित्त विभाग को भेजा गया है।

राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड सरकार अब जल्द ही प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) स्वयंसेवकों का मानदेय होमगार्ड के बराबर करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए युवा कल्याण विभाग की ओर से प्रस्ताव तैयार कर वित्त विभाग को भेजा गया है। वित्त विभाग की अनुमति मिलने के बाद पीआरडी कर्मियों का मानदेय बढ़ाने की राह प्रशस्त हो जाएगी।
प्रदेश में इस समय सात हजार से अधिक पीआरडी स्वयंसेवक विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन्हें लिपिक, अनुसेवक व गार्ड के रूप में विभागों में तैनात किया गया है। अभी इन्हें प्रतिदिन 500 रुपये मानदेय दिया जाता है। यानी जितने दिन की सेवा, उतने दिन का मानदेय। पहले होमगार्ड और पीआरडी स्वयंसेवकों का मानदेय एक समान था। वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों में होमगार्ड को पुलिस कर्मियों के समान वेतन देने का आदेश दिया था। यह आदेश प्रदेश में दो वर्ष बाद, यानी 2019 में लागू हुआ।
इसके तहत होमगार्ड को 600 रुपये मानदेय दिया जाना निश्चित हुआ। यानी 30 दिन काम करने के लिए 18 हजार रुपये। यही पुलिस कर्मियों का न्यूनतम वेतन आंका गया था। होमगार्ड का वेतन बढऩे के बाद पीआरडी स्वयंसेवकों ने भी समान अनुपात में मानदेय बढ़ाने की मांग की। इस मामले में कुछ पीआरडी स्वयंसेवक कोर्ट की शरण में भी गए हैं। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार भी इस दिशा में कदम आगे बढ़ा रही है।
सरकार ने युवा कल्याण विभाग को प्रस्ताव बनाकर शासन में भेजने को कहा। अब प्रस्ताव शासन में पहुंच गया है। वित्त विभाग मानेदय बढ़ाने से सरकार पर आने वाले वित्तीय भार का आकलन कर रहा है। वित्त विभाग की स्वीकृति के बाद इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए कैबिनेट के समक्ष लाया जाएगा। सूत्रों की मानें तो 26 जनवरी तक इस संबंध में फैसला ले लिया जाएगा।
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