कौन थे हेमवती नंदन बहुगुणा? जिन्होंने अमिताभ बच्चन से चुनाव हारने के बाद छोड़ दी थी राजनीति
Hemvati Nandan Bahuguna Jayanti बहुगुणा ने अंतिम सांस तक देश और पहाड़ों के विकास की ही फिक्र की। लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में अपना नाम दर्ज कराने वाले बहुगुणा ने अभिनेता अमिताभ बच्चन से चुनाव हारने के बाद राजनीति से छोड़ दी थी।

टीम जागरण, देहरादून : हिमालय पुत्र स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा की आज जयंती है। बहुगुणा को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने अंतिम सांस तक देश और पहाड़ों के विकास की ही फिक्र की। उत्तराखंड की आधार भूमि तय करने में भी उनकी भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता। लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में अपना नाम दर्ज कराने वाले बहुगुणा ने अभिनेता अमिताभ बच्चन से चुनाव हारने के बाद राजनीति से छोड़ दी थी।
पहाड़ों के सच्चे हितैषी थे बहुगुणा
हेमवती नंदन बहुगुणा का जन्म 25 अप्रैल 1919 को उत्तराखंड के पौड़ी जिले के बुघाणी गांव में हुआ। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा पौड़ी से ही ग्रहण की और इसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए की डिग्री हासिल की। शिक्षा ग्रहण करने के दौरान ही बहुगुणा स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ गए और बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी निभाई।
स्वतंत्रता संग्राम हो या आजादी के बाद देश को विकास के पथ पर अग्रसर करने की बात, बहुगुणा हर मोर्चे पर अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे। वह पहाड़ों के सच्चे हितैषी थे।
पहाड़ की पगडंडियों से निकलकर उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपना नाम दर्ज कराया। उन्हें हमेशा अपनी जन्मभूमि की चिंता रही। उन्होंने अलग पर्वतीय विकास मंत्रलय बनाकर विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले पहाड़ी क्षेत्रों के विकास को एक नई दिशा दी।
लोकसभा की सदस्यता भी छोड़ दी थी
बहुगुणा 1980 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में दोबारा शामिल हो गए। इसी दौरान दौरान कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की। बहुगुणा ने भी गढ़वाल से जीत दर्ज कि। लेकिन उन्हें कैबिनेट में जगह नहीं मिली। जिस वजह से छह माह के अंदर ही उन्होंने पार्टी के साथ ही लोकसभा की सदस्यता भी छोड़ दी थी।
इसके बाद उन्होंने 1982 में इलाहाबाद की इसी सीट पर हुए उपचुनाव में भी जीत हासिल की थी। 1984 का चुनाव में राजीव गांधी ने अमिताभ बच्चन को इनके सामने खड़ा कर दिया था। बहुगुणा लोकदल से मैदान में थे।
इन चुनावों में अमिताभ बच्चन ने बहुगुणा को एक लाख से ज्यादा वोटों से हरा दिया था। इस हार के बाद बहुगुणा ने राजनीति से संन्यास ले लिया था। राजनीति से संन्यास के बाद हेमवती नंदन बहुगुणा पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में लग गए थे।
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