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    उत्‍तराखंड में पश्चिमी विक्षोभ बना आफत, छह माह से बरस रहे बदरा; पहाड़ों के दरकने का बढ़ा खतरा

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 01:20 PM (IST)

    उत्तराखंड में मानसून ने कहर ढाया है जिससे भूस्खलन और बादल फटने की घटनाएं बढ़ी हैं। अगस्त में सामान्य से अधिक वर्षा हुई जिससे कई गांवों का संपर्क टूट गया। मौसम विभाग ने सितंबर में भी सामान्य से अधिक वर्षा का अनुमान जताया है। ग्रीष्मकाल में अधिक वर्षा होने से पहाड़ों की भूमि संवेदनशील हो गई है जिससे भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है।

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    मानसून सीजन में प्रदेश में सामान्य से 17 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई वर्षा। फाइल

    विजय जोशी, जागरण देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में इस बार मानसून कहर बनकर बरस रहा है। राज्यभर में भूस्खलन, बादल फटने, सड़क बाधित होने से जानमाल का भारी नुकसान हो रहा है। हालांकि, प्रदेश में पूरे मानसून सीजन में औसतन 1131.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य 963.7 मिमी की तुलना में 17 प्रतिशत ही अधिक है। लेकिन, अगस्त में बादल सामान्य से डेढ गुना बरसे हैं।

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    खास बात यह है कि इस बार बारिश का पैटर्न असमान रहा, कुछ जिलों में रिकार्ड तोड़ बारिश हुई, तो कुछ में सामान्य से भी कम वर्षा दर्ज की गई। आपदा का कारण एक सीमित क्षेत्र में हो रहे वर्षा के अत्यंत तीव्र दौर और ग्रीष्मकाल में हुई सामान्य से अधिक बारिश को माना जा रहा है। उत्तराखंड समेत उत्तरी हिमालयी क्षेत्र में दक्षिण पश्चिम मानसून के साथ पश्चिमी विक्षोभ के साइक्लोनिक सर्कुलेशन के रूप में सक्रिय होने से दुश्वारियां बढ़ गई हैं।

    भूस्खलन और फ्लैश फ्लड की घटनाएं बढ़ी

    अगस्त का महीना उत्तराखंड के लिए आपदाओं के लिहाज से भारी गुजर रहा है। प्रदेश में सामान्य से 46 प्रतिशत अधिक वर्षा के कारण पर्वतीय जिलों में जगह-जगह भूस्खलन और फ्लैश फ्लड की घटनाएं बढ़ी हैं। सीमित इलाकों में अत्यधिक तीव्र वर्षा के कारण हालात और भी खतरनाक बने हुए हैं। कई स्थानों पर बादल फटने जैसी घटनाओं से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

    कई गांवों का संपर्क टूट गया है, जबकि सड़कें और पुल बहने से यातायात ठप हो गया है। राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक सीएस तोमर ने बताया कि इस बार बारिश के बदले हुए पैटर्न ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।

    ग्रीष्मकाल में हुई अच्छी वर्षा के बाद मानसून में भी जमकर बारिश हो रही है। इसके कारण मिट्टी लंबे समय तक नम रहने से पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन की घटनाएं बढ़ी हैं। इसके अलावा, पश्चिमी विक्षोभ के साइक्लोनिक सर्कुलेशन के रूप में सक्रिय होने से पर्वतीय इलाकों में अत्यधिक तीव्र वर्षा के दौर अधिक हो गए हैं। इसका नतीजा है कि राज्य के कई हिस्सों में अचानक बादल फटने जैसी आपदाएं सामने आ रही हैं।

    सितंबर में सामान्य से अधिक वर्षा का पूर्वानुमान

    राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक सीएम तोमर के अनुसार, प्रदेश में अगले कुछ दिन भारी से बहुत भारी वर्षा का क्रम बना रह सकता है। दो सितंबर तक प्रदेश के ज्यादातर क्षेत्रों में भारी बारिश को लेकर आरेंज अलर्ट है।

    इसके साथ ही सितंबर के पहले सप्ताह में वर्षा का दौर जारी रह सकता है। दूसरे सप्ताह से बारिश का सिलसिला कुछ धीमा पड़ने के आसार हैं, लेकिन सितंबर में सामान्य से अधिक वर्षा रहने का अनुमान है। मानसून की विदाई सितंबर अंत तक अपने सामान्य समय में हो सकती है।

    ग्रीष्मकाल की वर्षा से संवेदनशील हुए पहाड़

    इस बार ग्रीष्मकाल में मार्च से लेकर मई के बीच रुक-रुककर वर्षा के दौर होते रहे। जिससे गर्मी सामान्य से कम रही। आमतौर पर सबसे गर्म रहने वाले मई में भी पारा सामान्य के आसपास ही बना रहा और बारिश सामान्य से 80 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई।

    वहीं, पूरे ग्रीष्मकाल में भी मेघ 32 प्रतिशत अधिक बरसे। एक जून से मानसून सीजन माना जाता है। जिसमें शुरुआत से ही वर्षा के दौर होते रहे। इसके बाद बीते 20 जून को दक्षिण-पश्चिम मानसून की दस्तक के बाद बारिश ने जोर पकड़ लिया और कई जगह भारी बारिश हुई।

    एक जून से अब तक मानसून सीजन में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। लगभग छह माह से नियमित अंतराल पर वर्षा होते रहने से पहाड़ों की भूमि में सामान्य से अधिक नमी बनी हुई है। ऐेसे में भारी बारिश के दौरान पहाड़ी दरकने का सिलसिला बढ़ गया है।

    मानसून सीजन में प्रदेश में हुई वर्षा की स्थिति

    • जिला, वास्तविक वर्षा, सामान्य वर्षा, अंतर
    • बागेश्वर, 2208.7, 653.7, 238
    • चमोली, 1117.7, 604.5, 85
    • हरिद्वार, 1238.3, 808.4, 53
    • टिहरी गढ़वाल, 1186.5, 781, 52
    • देहरादून, 1496.6, 1205, 24
    • अल्मोड़ा, 795.1, 653.7, 22
    • ऊधम सिंह नगर, 1032.8, 929.9, 11
    • उत्तरकाशी, 1064.3, 964.6, 10
    • पिथौरागढ़, 1166.9, 1244, -6
    • रुद्रप्रयाग, 1231.7, 1315.8, -6
    • नैनीताल, 1101.2, 1259.9, -13
    • चंपावत, 856.3, 1064.1, -20
    • पौड़ी गढ़वाल, 765.3, 1048.8, -27
    • प्रदेश में औसत, 1131.2, 963.7, 17

    (वर्षा मिलीमीटर और अंतर प्रतिशत में है।)