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हरिद्वार अर्द्धकुंभ 2027: आपदा प्रबंधन की तैयारी, बनेगा खतरे का नक्शा

Published: Thu, 03 Sep 2026 01:32 PM (GMT+05:30)

सरकार हरिद्वार अर्द्धकुंभ 2027 के लिए एक व्यापक आपदा प्रबंधन योजना तैयार करने हेतु विशेषज्ञ एजेंसी का चयन कर रही है।

इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

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संक्षेप में पढ़ें

राज्य ब्यूरो, देहरादून। हरिद्वार अर्द्धकुंभ-2027 में उमड़ने वाली आस्था की भीड़ के बीच कोई चूक भारी न पड़े, इसके लिए सरकार आपदा का इंतजार करने के बजाय संभावित खतरे पहले ही चिह्नित करेगी।

अर्द्धकुंभ के लिए व्यापक आपदा प्रबंधन योजना तैयार करने को विशेषज्ञ एजेंसी का चयन किया जाएगा। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एजेंसी अर्द्धकुंभ क्षेत्र में संभावित खतरों, संवेदनशील स्थानों व उपलब्ध संसाधनों का आकलन कर सुरक्षा और आपात स्थिति से निपटने की विस्तृत योजना बनाएगी।

अब तक हुए कुंभ में भीड़ प्रबंधन, निगरानी व आपदा से निपटने को अलग-अलग व्यवस्थाएं अपनाई गईं। प्रयागराज कुंभ-2019 में कमांड सेंटर, सीसीटीवी निगरानी और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय पर जोर दिया गया था। हरिद्वार में अब अर्द्धकुंभ से पहले ही यह आकलन कराने की तैयारी है कि कहां खतरा पैदा हो सकता है, भीड़ कहां दबाव बना सकती है और किसी घटना की स्थिति में उपलब्ध व्यवस्था कितनी सक्षम है।

पहले बनेगा खतरे का नक्शा

विशेषज्ञ एजेंसी अर्द्धकुंभ क्षेत्र में संभावित खतरे व जोखिम वाले स्थानों की पहचान करेगी। यह देखा जाएगा कि किसी आपदा की स्थिति में वहां कितना नुकसान हो सकता है। इससे निपटने को पुलिस, स्वास्थ्य, अग्निशमन, बचाव दल और अन्य संसाधन पर्याप्त हैं या नहीं।

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स्नान घाट, प्रमुख मार्ग, प्रवेश और निकासी क्षेत्र समेत ऐसे स्थान चिह्नित किए जाएंगे, जहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर भीड़ का दबाव पैदा हो सकता है। इससे प्रशासन को पहले से पता रहेगा कि किस क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा, संसाधन या वैकल्पिक मार्ग की जरूरत पड़ सकती है।

पहले होगा तय, भीड़ बढ़ी तो कैसे संभालेंगे

भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए दबाव वाले स्थानों का आकलन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर भीड़ को किस दिशा में मोड़ा जाएगा और लोगों की सुरक्षित निकासी कैसे होगी, इसकी पहले से योजना तैयार होगी।

आग, बाढ़, भगदड़ या आपात स्थिति में पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन और एसडीआरएफ समेत संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी पहले से तय की जाएगी। कौन मौके पर पहुंचेगा, राहत-बचाव कैसे शुरू होगा और लोगों को कहां सुरक्षित पहुंचाया जाएगा, इसका स्पष्ट खाका तैयार होगा।

‘हरिद्वार अर्द्धकुंभ-2027 में आपदा से पहले ही संभावित खतरे और भीड़ के दबाव वाले स्थान चिह्नित कर आपात स्थिति से निपटने की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है।’ -राम सिंह कैड़ा, शहरी विकास मंत्री

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