उतार-चढ़ाव भरा रहा है हरक का सियासी सफर, अब जेनी के आरोपों के चलते चर्चा में
उत्तराखंड की राजनीति में हरक सिंह रावत का सियासी सफर लगातार उतार-चढ़ाव और दल-बदल के घटनाक्रमों से भरा रहा है। ...और पढ़ें

हरक सिंह रावत।

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राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में हरक सिंह रावत उन नेताओं में शामिल हैं, जिनका सियासी सफर लगातार उतार-चढ़ाव और पाला बदल के घटनाक्रमों से भरा रहा है। कभी भाजपा, कभी बसपा फिर कांग्रेस से होते हुए भाजपा तक पहुंचे हरक दोबारा से वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के हो गए हैं।
कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव के दृष्टिगत उन्हें प्रदेश चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी।अब वह जेनी की ओर से लगाए गए आरोपों के चलते चर्चा के केंद्र में हैं।
66 वर्षीय हरक सिंह रावत ने वर्ष 1989 से सक्रिय राजनीति में कदम रखा। तब वह विधानसभा की पौड़ी सीट से चुनाव हार गए थे। वर्ष 1991 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर इस सीट से जीत दर्ज की। तब वह उत्तर प्रदेश की तत्कालीन भाजपा सरकार में सबसे छोटी आयु के मंत्री बने और उन्हें पर्यटन राज्यमंत्री बनाया गया।
वर्ष 1993 में भी पौड़ी से जीतकर वह विधानसभा पहुंचे। वर्ष 1998 में टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने भाजपा छोड़ बसपा का दामन थाम लिया। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद वर्ष 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में वह कांग्रेस के टिकट पर लैंसडौन सीट से विधायक बने। वर्ष 2007 में भी वह इसी सीट से विजयी रहे और नेता प्रतिपक्ष बने। वर्ष 2012 में वह रुद्रप्रयाग सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे।
2016 का घटनाक्रम बना सियासी मोड़
वर्ष 2016 में कांग्रेस सरकार के खिलाफ बगावत कर हरक सिंह रावत नौ विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए। वर्ष 2017 में भाजपा ने उन्हें कोटद्वार से टिकट दिया।
जीत के बाद वह प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। हालांकि, जनवरी 2022 में विधानसभा चुनाव से ऐन पहले भाजपा ने हरक को अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। इसके बाद हरक की कांग्रेस में वापसी हुई।
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