आखिर कौन है जेनी? जिसने उत्तराखंड की सियासत में मचाई हलचल.. बेटे के लिए मांग रही न्याय
उत्तराखंड की राजनीति में चर्चित 'जेनी प्रकरण' की मुख्य पात्र इन्द्राणी देवड़ी (जेनी) असम की रहने वाली हैं, जो 2002-03 ...और पढ़ें

HighLights
जेनी असम की महिला, 2002-03 में देहरादून आई थी
अपने बेटे को पिता का नाम दिलाने के लिए न्याय मांग रही
मामला पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत से जुड़ा हुआ है
राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल लाने वाले चर्चित ''जेनी प्रकरण'' की मुख्य पात्र जेनी (इन्द्राणी देवड़ी) असम की रहने वाली एक महिला है। जो करीब 23 साल पहले (साल 2002-2003 में) देहरादून आई थीं। वर्तमान में वह असम में अपने परिवार के साथ जीवन यापन कर रही हैं। जेनी का कहना है कि उनका एक बेटा है, जिसे वह पिता का नाम दिलाने के लिए न्याय की मांग कर रही हैं।
जेनी ने बताया, वह अक्टूबर, 2002 में माडलिंग में करियर बनाने के लिए देहरादून आई थीं। उस समय उनकी उम्र महज 16 से 17 साल के बीच थी। देहरादून आने के बाद जब उन्हें माडलिंग का काम नहीं मिला, तो उन्होंने अपनी आजीविका चलाने के लिए देहरादून में प्रिंस चौक स्थित एक एसटीडी बूथ पर काम किया।
हरक सिंह रावत के घर पर काम मिला
उन्होंने बताया कि एसटीडी बूथ पर काम करने के दौरान वहां एक कांग्रेस कार्यकर्ता फोन करने आता था। जेनी ने उससे काम दिलाने की गुहार लगाई, जिसके बाद उस कार्यकर्ता की पैरवी पर उन्हें तत्कालीन कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत के घर पर काम मिला और वह उनके यमुना कालोनी स्थित सरकारी आवास पर ही रहने लगीं।
वहीं, हरक सिंह रावत का कहना है कि टिहरी की तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष बीना सजवाण और धनीलाल शाह व अनिल गुप्ता जैनी को उसके पास लेकर आए थे। उन्होंने जैनी को काम पर रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इसका कोई ठौर ठिकाना नहीं है इसलिए दो दिनों तक वह उनके घर पर रही। इसके बाद उन्होंने उसे नारी निकेतन भेज दिया।
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