देहरादून, राज्य ब्यूरो। कंडी रोड के लालढांग-चिलरखाल मार्ग का निर्माण कार्य रोकने संबंधी आदेश का मामला तूल पकड़ गया है। इस मामले में अपर सचिव ओमप्रकाश के खिलाफ मोर्चा खोले वन और पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि वन मंत्रालय अपर मुख्य सचिव के इस आदेश को नहीं मानता। इस सड़क का काम किसी भी हालत में रोका नहीं जाएगा। बड़े आंदोलन की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि श्रमदान के जरिये सड़क बनवाई जाएगी। वह खुद एक माह का वेतन इसके लिए देंगे और अन्य लोगों से भी मदद मांगेगे। साथ ही कहा कि इसे लेकर यदि किसी को मुकदमा करना है तो उनके खिलाफ करे। सड़क के लिए उन्हें जेल भी जाना पड़े तो वह जाएंगे। 

शासन ने लालढांग-चिलरखाल मार्ग का निर्माण कार्य रोकने के आदेश लोनिवि को दिए थे। इससे वन मंत्री डॉ. रावत खफा हैं। उनका कहना है कि डीएफओ के कहने पर अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश सड़क का काम रोकने का आदेश कैसे कर सकते हैं। इस मसले पर डॉ.रावत रविवार को भी मुखर रहे। मीडियाकर्मियों से अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर वे ताकतें कौन सी हैं, जो अपर मुख्य सचिव और डीएफओ की आड़ में नियमों के विरुद्ध इस सड़क का काम रुकवाना चाहते हैं। 

वन मंत्री ने कहा कि इस सड़क के निर्माण को लेकर न तो एनटीसीए ने काम रोकने के आदेश दिए और न एनजीटी ने। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि गलत नियमों का हवाला देकर काम क्यों रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश यह कार्य रुकवाने को अधिकृत नहीं हैं। सड़क के लिए सरकार के स्तर पर भूमि लोनिवि को हस्तांतरित हुई है। इस सड़क के बनने से राज्यवासियों को लाभ मिलेगा। डॉ. रावत ने कहा कि इस सड़क का काम किसी भी दशा में रोका नहीं जाएगा। 

उनका कहना है कि वे खुद इसका कार्य करवाएंगे। इसके लिए श्रमदान और जनता के सहयोग से सड़क बनाई जाएगी। वह खुद भी एक माह का वेतन इसके निर्माण को देंगे। उन्होंने दावा किया कि चिलरखाल के नजदीक करीब 130 मीटर के स्पान पुल का कार्य शुरू हो गया है। हरक सिंह रावत ने कहा कि अगर किसी को मुकदमा दर्ज कराना है तो उनके खिलाफ कराए। सड़क के लिए वह जेल जाने को भी तैयार हैं, मगर काम नहीं रुकने देंगे। 

मेरे खिलाफ रचा जा रहा षड्यंत्र 

वन मंत्री ने कहा कि लालढांग-चिलरखाल सड़क को लेकर उनके आक्रामक तेवरों को देखते हुए उनके खिलाफ षड्यंत्र रचा जा रहा है। उन्होंने यह बात आयुर्वेद विवि में उनके रिश्तेदार और पीआरओ की पत्‍‌नी को हटाए जाने से संबंधित सवाल के जवाब में कही। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई नियुक्ति नहीं हुई थी। न तो उनकी भांजी ने कोई वेतन लिया और न उनके पीआरओ की पत्नी ने। ऐसे में हटाने का कोई सवाल ही नहीं है। उन्होंने अपनी भांजी को पूर्व में सिर्फ कार्य सीखने के लिए कहा था, मगर वह सालभर से गई ही नहीं। उन्होंने कहा कि बेवजह इस प्रकरण को वर्तमान में तूल देने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि उनका ध्यान सड़क से हट सके।

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