देहरादून, जेएनएन। वर्ष 2009 में विधानसभा का घेराव कर हंगामा करने के मामले में आरोपित कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत अब 22 जनवरी को सीजेएम कोर्ट में पेश होंगे। उन्हें सोमवार को अदालत में पेश होना था, लेकिन एक वरिष्ठ अधिवक्ता के निधन के चलते शोक अवकाश हो जाने के कारण वह पेश नहीं हो सके।

बता दें, नौ साल पुराने मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनींद्र मोहन पाडेय की अदालत ने सितंबर महीने में उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य, सुबोध उनियाल व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह पर आरोप तय कर दिए थे। उस समय कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत समेत पांच आरोपितों के पेश न होने के कारण उनकी पत्रावली सुनवाई के लिए अलग कर दी गई थी। बाद में अदालत ने कोर्ट में पेश न होने वाले आरोपितों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर 14 जनवरी तक कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था।

यह है मामला कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत, यशपाल आर्य व सुबोध उनियाल काग्रेस में रहते हुए बीस दिसंबर 2009 को पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ विधानसभा कूच कर रहे थे। तब राज्य में भाजपा की सरकार थी, पुलिस ने इन सभी को रिस्पना पुल पर रोक लिया।

इससे आक्रोशित होकर इन्होंने पुलिस बल के साथ धक्का-मुक्की की और उत्तेजक नारे लगाए। मामले में 25 के खिलाफ नेहरू कॉलोनी थाने में अभियोग पंजीकृत किया गया था। 2013 से इस मामले में सुनवाई चल रही है। मामले में कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य, हरक सिंह रावत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष समेत 25 के खिलाफ आइपीसी की धारा 147, 149, 332, 353, 336 व 504 में मुकदमा दर्ज हुआ था।

इन पर तय हो चुके हैं आरोप

कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य व सुबोध उनियाल, खानपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक प्रणव चैंपियन, पूर्व मंत्री दिनेश अग्रवाल व हीरा सिंह बिष्ट, प्रदेश काग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह, पूर्व सासद प्रदीप टम्टा, सूर्यकात धस्माना, ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, लाल चंद शर्मा, संग्राम सिंह पुंडीर, विकास चौधरी, भूपेंद्र, विजय सिंह चौहान, विवेक खंडूड़ी, मनीष नागपाल, महेश शर्मा, शिवेश बहुगुणा, टिवंकल खन्ना, राव आफाक।

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