देहरादून, जेएनएन। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष पर आज गुरु पूर्णिमा का पर्व कोरोनाकाल के चलते सादगी से मनाया गया। शिष्य घरों पर गुरु वंदना की, जबकि आश्रम, मंदिर व गुरुद्वारों में शारीरिक दूरी बनाकर पूजा की गई।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ की इस पूर्णिमा के दिन महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। पंडित वेदप्रकाश बताते हैं कि इस दिन की विशेष महत्ता है। शिष्य गुरु की पूजा कर उन्हें दक्षिणा, पुष्प, वस्त्र आदि भेंट करते हैं। इस दिन गंगा स्नान का भी महत्व है। इस दिन घरों पर लोग भगवान विष्णु की पूजा भी करते हैं। हालांकि, कोरोनाकाल के चलते इस बार पर्व को सादगी से मनाया जा रहा है।

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, निरंजनपुर के मीडिया प्रभारी हरीश नौटियाल ने बताया कि इस समय संस्थान में कोई भी कार्यक्रम नहीं हो रहा है। गुरु पर्व को लेकर दिल्ली हेडक्वार्टर से मिले निर्देशों के तहत घर पर ही यह पर्व मनाया जाएगा।

विश्व जागृति मिशन क्लेमेनटाउन के मीडिया प्रभारी भूपेंद्र चड्ढा ने बताया कि आज सुबह साढ़े आठ से 11 बजे तक सुधांशु महाराज फेसबुक और यूट्यूब पर भक्तों को लाइव आशीर्वाद देंगे। रामतीर्थ मिशन राजपुर रोड के मीडिया प्रभारी राजेश पैन्यूली ने बताया कि गुरु पूर्णिमा पर चार लोगों की मौजूदगी में गुरु और आश्रम के संस्थापक स्वामी हरिओम और पहले परमाध्यक्ष स्वामी गोविंद प्रकाश की समाधियों का पूजन होगा। 

आशाराम आश्रम सहस्रधारा रोड की मीडिया प्रभारी तृप्ता शर्मा ने बताया कि श्रद्धालु़ गुरु का ध्यान घर पर रहकर करेंगे। रायपुर रोड गुरुद्वारा के सिख को-ऑर्डिनेशन कमेटी के अध्यक्ष गुरदीप सिंह सहोता ने बताया कि इस बार गुरु महाराज का पाठ व कीर्तन सादगी से किया जाएगा। शाम सात बजे से रात 10 बजे तक कार्यक्रम होगा। चैतन्य गौड़ीय मठ डीएल रोड के स्वामी त्रिदंडी भक्ति प्रसन्न त्यागी महाराज ने बताया कि गुरुपाठ सुबह होगा। श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए शाम चार से सात बजे तक आश्रम के द्वार खुले रहेंगे।

मंदिरों में होगी पूजा

गुरु पूर्णिमा पर भक्त मंदिरों में पूजा कर मन्नत मांगेंगे। मां डाटकाली, दुर्गा माता मंदिर सर्वेचौक, टपकेश्वर महादेव मंदिर, श्याम सुंदर मंदिर पटेलनगर में आयोजन की तैयारियां की गई हैं। 

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पूजा विधि

गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर गंगाजल से स्नान करें। मंदिर में चौकी पर सफेद कपड़ा बिछाकर उस पर बैठकर गुरुमंत्र का जाप करें। यदि गुरु सामने हैं तो सबसे पहले उनके चरण धोएं. उन्हें तिलक लगाएं और फूल अर्पण करें। उन्हें भोजन कराएं और दक्षिणा दें।

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