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    उत्‍तराखंड में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाएगा जीएसआइ, इन चार जिलों में होगा इन्‍स्‍टॉल

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 08:00 PM (IST)

    भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) उत्तराखंड में भूस्खलन की घटनाओं को कम करने के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करेगा। प्रारंभिक चरण में चमोली रुद्रप्रयाग उत्तरकाशी और टिहरी जिलों को कवर किया जाएगा। यह सिस्टम नागरिकों और सरकार को पहले ही अलर्ट कर देगा जिससे राहत और बचाव कार्य में मदद मिलेगी। यह आपदा प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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    आपदा पूर्व तैयारियों में मददगार साबित होगा। जागरण आर्काइव

    जागरण संवाददाता, देहरादून। इस मानसून सीजन में जिस तरह अतिवृष्टि से भूस्खलन की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं, उसने सरकारी तंत्र की चिंता बढ़ा दी है। सर्वाधिक जान-माल का नुकसान भूस्खलन की चेपट में आने से ही हो रहा है।

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    इस स्थिति को देखते हुए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआइ) ने मदद का हाथ बढ़ाया है। राज्य में भूस्खलन से सचेत करने के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने को जीएसआइ अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाएगा। इसको लेकर शुक्रवार को जीएसआइ की कार्यशाला के दौरान राज्य के साथ एमओयू किया गया।

    एमओयू पर जीएसआइ के उप महानिदेशक डा सीडी सिंह और आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन से हस्ताक्षर किए। उप महानिदेशक सीडी सिंह ने कहा कि प्रथम चरण में राज्य के चार जिलों (चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और टिहरी) को अर्ली वार्निंग सिस्टम से लैस लिया जाएगा।

    इस दिशा में धरातल पर काम भी शुरू कर दिया गया है और प्रयोग के तौर पर अलर्ट जारी किए जा रहे हैं। जल्द यह प्रणाली पूरी तरह काम करने लगेगी। अगले चरण में बाकी जिलों को भी अलर्ट सिस्टम से जोड़ा जाएगा।

    उन्होंने कहा कि यह सिस्टम भूस्खलन से पहले ही नागरिकों और सरकार को अलर्ट कर देगा। इसके अनुसार राहत एवं बचाव के कार्य तत्परता से किए जा सकेंगे। यह प्रक्रिया आपदा पूर्व की तैयारियों की दिशा में बेहद कारगर साबित होगी।