देहरादून, निशांत चौधरी। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के सचिव पद के चुनाव में बीसीसीआइ उपाध्यक्ष महिम वर्मा एक बार फिर सीएयू के सचिव बन गए हैं। इसके साथ सीएयू के चुनाव तो खत्म हो गए, लेकिन एसोसिएशन में गुटबाजी अभी भी जारी है। इसका ताजा उदाहरण सीएयू सचिव के पदभार ग्रहण में देखने को मिला। 

महिम के सचिव का पदभार ग्रहण के दौरान एसोसिएशन के सदस्य अनुपस्थित थे, जबकि पदभार ग्रहण कार्यक्रम की सूचना सभी सदस्यों को दी गई थी। बीसीसीआइ से उत्तराखंड क्रिकेट को मान्यता मिले अभी साल भर भी नही हुआ। एसोसिएशन में बढ़ती गुटबाजी उत्तराखंड क्रिकेट के हित में नहीं है। 

डर इस बात का है कि क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के बीच चल रही गुटबाजी प्रदेश की उभरती क्रिकेट प्रतिभाओं पर भारी न पड़ जाए। लेकिन एसोसिएशन के सदस्य प्रदेश के क्रिकेट को बढ़ावा देने की बजाय एसोसिएशन में ज्यादा से ज्यादा 'पावर' की चाहत रख रहे है।

आखिरकार मिल गया आशियाना

देर आए दुरुस्त आए। यह कहावत क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड पर बिल्कुल फिट बैठती है। सीएयू को देर से ही सही लेकिन ऑफिस के लिए स्थायी जगह मिल ही गई। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) से मान्यता मिलने के बाद से एसोसिएशन के तीन-तीन कार्यालय चल रहे थे।

बीते दिनों राजपुर रोड स्थित एक कोचिंग संस्थान व होटल में सीएयू के कार्यालय चल रहे थे। इन्हें बंद करने के बाद ईसी रोड स्थित एक होटल से सीएयू का कार्यालय संचालित किया गया। कुछ महीनों बाद इसे भी बंद कर दिया गया। जिसके बाद मौजूदा समय में कॉन्वेंट रोड स्थित एक घर को कार्यालय में तब्दील कर एसोसिएशन के सभी कामकाज यहीं से किए जा रहे थे। अब एसोसिएशन को राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में स्थायी कार्यालय चलाने की मंजूरी मिल गई है। अब एक अप्रैल से स्टेडियम में ही क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड का कार्यालय संचालित किया जाएगा। 

कंप्यूटर किराए का 'खेल' 

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ)की देश-विदेश में सबसे धनी बोर्ड के रूप में गिनती होती है, लेकिन विडंबना देखिए कि क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (सीएयू) के कार्यालय में किराए के कंप्यूटर चल रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि क्रिकेट के संचालन में करोड़ों रुपये खर्च करने वाली सीएयू क्या इतनी गरीब हो गई जो किराए के कंप्यूटर से अपना काम संचालित कर रही है। 

सूत्र बताते है कि हकीकत में इससे अपने चेहतों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। क्योंकि एक कंप्यूटर का मासिक किराया पांच हजार रूपये है। सामान्य काम करने के लिए कंप्यूटर करीब बीस हजार रुपये में मिल जाता है। इस कीमत में कंप्यूटर खरीदना सीएयू के लिए मुश्किल नहीं है। इससे स्पष्ट है कि एसोसिएशन किराए पर कंप्यूटर कमजोर स्थिति के कारण नहीं बल्कि अपने चेहतों की जेब गर्म करने के लिए ले रहा है। सच जानने के लिए इसकी जांच होनी चाहिए।  

घोषणाएं पूरा करना चुनौती

क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड ने प्रदेश के खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं बनाने की घोषणा तो कर दी हैं, लेकिन इन्हें पूरा करना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। सीएयू ने प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए कांट्रेक्ट योजना व स्कॉलरशिप योजना लागू करने की घोषणा की है। लेकिन सीएयू के पिछले छह महीने उथल-पुथल भरे रहे हैं। जिस कारण  सीएयू इन योजनाओं को लागू करने के लिए अब तक ब्ल्यू प्रिंट तक तैयार नहीं कर पाई है। 

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ऐसे में इन्हें धरातल तक लाने की चुनौती से कम नहीं होगा। हालांकि अब सीएयू के सचिव पद पर चुनाव होने के बाद एसोसिएशन की  कार्यकारिणी पूरी हो गई है। सीएयू सचिव महिम वर्मा मौजूदा समय में बीसीसीआइ उपाध्यक्ष भी है। ऐसे में महिम सेखिलाड़ियों को ज्यादा अपेक्षा रहेगी कि वह इन घोषणाओं को धरातल तक लेकर आएं। जिससे राज्य के क्रिकेटरों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा।

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